पोर्न के दम पर चल रहा है इंटरनेट?

  • 7 जून 2019
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क़रीब डेढ़ दशक पहले म्यूज़िकल कॉमेडी 'एवेन्यू क्यू' का वो गाना याद होगा जिसकी शुरुआती लाइन है- 'द इंटरनेट इज़ फॉर पोर्न' यानी इंटरनेट पोर्न के लिए है.

इसमें केट मॉन्स्टर कहती है- "इंटरनेट वाकई बहुत बढ़िया चीज़ है."

ट्रेकी मॉन्स्टर- "फॉर पोर्न"

केट मॉन्स्टर- "मेरे पास फ़ास्ट कनेक्शन है, इसलिए मुझे इंतज़ार नहीं करना पड़ता."

ट्रेकी मॉन्स्टर- "फॉर पोर्न"

इस शो में मासूम किंडरगार्टन टीचर केट मॉन्स्टर ख़रीदारी और जन्मदिन की बधाई देने के लिए इंटरनेट की उपयोगिता पर खुशी मनाती है.

इसके बीच बीच में उसका असभ्य पड़ोसी ट्रेकी मॉन्स्टर इस बात पर ज़ोर देता है कि लोग इंटरनेट को अंतरंग गतिविधियों के लिए ज़्यादा तवज्जो देते हैं.

क्या ये सही बात है? कुछ हद तक, लेकिन पूरी तरह नहीं.

आंकड़े बताते हैं कि इंटरनेट पर सर्च किए जाने वाले सात में से एक विषय पोर्न के बारे में होता है. ये मामूली नहीं है लेकिन इसका मतलब यह भी है कि सात में से छह सर्च इस बारे में नहीं है.

सबसे अधिक सर्च की जाने वाली पोर्न वेबसाइट पोर्नहब क़रीब क़रीब नेटफ़्लिक्स और लिंक्डइन जितनी ही लोकप्रिय है.

यानी इसकी लोकप्रियता बहुत है लेकिन फिर भी दुनिया भर में लोकप्रियता के मामले में ये 28वें पायदान पर है.

एवेन्यू क्यू 2003 में पहली बार आया था. इंटरनेट के लिहाज से देखें तो उससे भी पहले. और उस समय ट्रेकी मॉन्स्टर की बात सही रही होगी.

आम तौर पर नई तकनीक बहुत महंगी और कम भरोसेमंद होती हैं. उन्हें एक ऐसा बाज़ार चाहिए होता है जिसमें लोग जल्दी से अभ्यस्त हो सकें और उनके तौर तरीके उस तकनीक को विकसित करने में मदद कर सकें.

जब ये सस्ती और ज़्यादा भरोसे वाली हो जाती है तो इसकी पकड़ में बड़ा बाज़ार आ जाता है और इसका अन्य क्षेत्रों में भी इस्तेमाल शुरू हो जाता है.

इसी सिद्धांत के आधार पर पोर्नोग्राफ़ी ने इंटरनेट और इससे जुड़ी अन्य तकनीक के विकास में अहम भूमिका निभाई है. क्या वाकई इसने इंटरनेट को बढ़ाया है?

कला की शुरुआत से ही सेक्स हमेशा एक विषय बना रहा है. प्रागैतिहासिक गुफ़ा मानव दीवारों पर शरीर के गुप्तांगों के रेखाचित्र बनाते थे.

अंतरंग जोड़े का रेखाचित्र कम से कम 11,000 साल पहले बना हुआ पाया गया है.

मेसोपोटामिया के एक कलाकार ने 4000 साल पहले टेराकोटा से औरत और मर्द के अंतरंग क्षणों को कलाकृति के माध्यम से जीवंत किया था.

इसके कुछ शताब्दी बाद उत्तरी पेरू में मोशे ने मिट्टी से ऐसी ही कलाकृति बनाई. भारत का कामसूत्र भी इसी दौर का है.

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कला के विकास में योगदान

लोग कला का इस्तेमाल उत्तेजक क्षणों को कलाकृति में उतारने के लिए करते थे, इसका ये मतलब नहीं कि इन हुनरों के विकास के पीछे इसी का योगदान है. ऐसा सोचने का कारण भी नहीं है.

गुटेनर्ग के प्रिंटिंग प्रेस का ही उदाहरण लें. हालांकि आशिक मिजाज़ी किस्म की पुस्तकें भी प्रकाशित होती थीं, लेकिन इसका मुख्य बाज़ार धार्मिक पुस्तकें थीं.

इसी बीच कला के क्षेत्र में 19वीं शताब्दी में धीरे धीरे फ़ोटोग्राफ़ी का प्रवेश होता है. कथित आर्ट स्टडीज़ के नाम पर तब पेरिस के अग्रणी स्टूडियो का बहुत चमकता बाज़ार हुआ करता था.

ग्राहक इस तकनीक के लिए अधिक पैसे देने को राज़ी थे. एक समय तो ऐसा भी था कि एक उत्तेजक तस्वीर की क़ीमत, उस समय एक यौनकर्मी को दिए जाने वाले भुगतान से भी अधिक होती थी.

पोर्नोग्राफ़ी शब्द ग्रीक से आया है जिसका संदर्भ था "लेखन" और "यौनकर्मी."

कलात्मक अभिव्यक्ति में तब तक एक बड़ी क्रांतिकारी तकनीक का आगमन हो चुका था यानी चलचित्र का.

लेकिन फ़िल्म उद्योग के बढ़ने में पोर्न का कोई बड़ा हाथ नहीं था. इसके स्वाभाविक कारण थे. फ़िल्में महंगी थीं. विशाल दर्शकों से ही आप इसकी क़ीमत वसूल सकते थे.

इसका मतलब था कि लोग सामूहिक रूप से इसे देखें. हालांकि कई लोगों ने पोर्नोग्राफ़िक फ़िल्में देखने का खर्च उठाया लेकिन सिनेमा घरों में इसे सामूहिक रूप से देखने में बहुत कम ही लोग खुद को सहज पाते थे.

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Image caption पेनी पीपशो की एक्टर डेबी राए

पोर्न और तकनीक का विकास

1960 के दशक में पीप-शो बूथों (बाइस्कोप जैसा) का चलन शुरू हुआ. इसमें सिक्का डालकर फ़िल्म देखी जा सकती थी.

तब एक एक बूथ की हफ़्ते की कमाई हज़ारों डॉलर में हुआ करती थी. लेकिन वास्तविक निजता वाला माहौल वीडियो कैसेट रिकॉर्डर (वीसीआर) के आने के बाद ही संभव हो पाया.

पैचन बार्स अपनी किताब 'द इरोटिक इंजन' में कहते हैं कि वीसीआर के साथ ही पोर्न एक आर्थिक और तकनीकी पावरहाउस के रूप में खुद-ब-खुद आ गया.

शुरुआत में वीसीआर बहुत महंगे थे और दो अलग अलग स्वरूप में आते थे- वीएचएस और वीटामैक्स.

कोई भी एक ऐसे उपकरण में आमदनी का एक बड़ा हिस्सा क्यों लगाता जो जल्द ही पुराना पड़ जाने वाला था?

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Image caption बहुत ही सफल एक्स रेटेड वीडियो 'डीप थ्रोट' में एडल्ट एक्टर लिंडा लवलेस ने काम किया. बाद में उन्होंने ज़बरिया काम कराए जाने की शिकायत की और फिर एंटी पोर्न प्रचारक बन गईं.

केबल टीवी फिर इंटरनेट

1970 के दशक के उत्तरार्द्ध में अधिकांश वीडियो टेप पोर्नोग्राफ़ी से संबधित थे.

इसके कुछ साल बाद ही, उन लोगों के लिए तकनीक इतनी सस्ती हो गई कि वे पारिवारिक फ़िल्में देख सकें और इस तरह इसके बाज़ार का विस्तार हुआ और पोर्न का बाज़ार सिमटा भी.

यही कहानी केबल टेलीविज़न और इंटरनेट के साथ भी रही है.

1990 के दशक में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि उस समय साझा की जाने वाली छह में से पांच तस्वीरें पोर्नोग्राफ़ी से संबंधित हुआ करती थीं.

कुछ सालों में बाद हुए एक अन्य शोध में पता चला कि इंटरनेट चैट रूम गतिविधियां भी इसी अनुपात में सेक्स से संबंधित थीं.

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इंटरनेट से जुड़ी तकनी का विकास

इसलिए उन दिनों ट्रेकी मॉन्स्टर का अनुमान बहुत ग़लत नहीं रहा होगा.

और जैसा कि वो केट से कहता है, पोर्न की भूख ने फ़ास्ट कनेक्शन, बढ़िया मॉडम और ऊंची बैंडविड्थ की मांग को बढ़ाने में मदद की.

इसने अन्य क्षेत्रों में नई खोजों के लिए रास्ता भी बनाया. ऑनलाइन पोर्न बनाने वाले वेब टेक्नोलॉजी में अग्रणी थे. जैसे कि वीडियो फ़ाइल को छोटा करना और भुगतान को बहुत ही आसान करना आदि.

मार्केटिंग प्रोग्राम्स जैसे बिज़नेस मॉडल में भी इनका बड़ा योगदान रहा है.

ये सभी आइडिया अधिक से अधिक पहुंच हासिल करने के तरीक़ों को खोजने में मददगार थे. और जब इंटरनेट का विस्तार हुआ, पोर्न की बजाय इसका अन्य चीजों के लिए इस्तेमाल बढ़ता गया.

आजकल, प्रोफ़ेशनल पोर्नोग्राफ़र्स के लिए इंटरनेट मुश्किलें बढ़ा रहा है. जैसे जब अख़बार और म्यूज़िक वीडियो ऑनलाइन फ्री उपलब्ध हैं तो कोई इसे क्यों ख़रीदेगा, उसी तरह जब पोर्नहब जैसी फ़्री वेबसाइटें मौजूद हैं तो पोर्न बेचने में मुश्किल होगी ही.

फ़्री पोर्न का बहुत बड़ा हिस्सा पाइरेटेड होता है और ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से अपलोड किए गए वीडियो को हटाना बहुत मुश्किल काम है.

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Image caption एडल्ट एक्टर केसी कालवर्ट

पोर्न का बाज़ार

एक नया बाज़ार कस्टम पोर्न बनाने का उभर रहा है, जिसमें दर्शक अपनी पसंसदीदा प्लॉट पर पोर्न फ़िल्माने के लिए भुगतान करते हैं.

लेकिन फ़िल्म बनाने वालों के लिए जो बुरा है वो एग्रीगेटर वेबसाइटों के लिए मुनाफ़ेवाला साबित हो रहा है, जिन्हें विज्ञापन और प्रीमियम ग्राहकों से पैसा मिलता है.

इस समय पोर्न इंडस्ट्री में माइंडगीक कंपनी सबसे आगे है और जिसके पास पोर्नहब समेत 10 शीर्ष पोर्न वेबसाइटों में से सात का मालिकाना हक़ है.

वेंकुवर स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स की प्रोफ़ेसर मैरिना एडशेड के अनुसार, बाज़ार पर इस तरह का एकाधिकार एक समस्या है.

वो कहती हैं, "केवल एक ग्राहक होने से निर्माताओं पर अपनी फ़िल्मों की लागत कम करने का दबाव रहता है."

"इससे पोर्नोग्राफ़र के लाभ में तो कमी नहीं आती है जबकि पोर्न एक्टरों पर दबाव बढ़ जाता है कि जो उन्होंने पहले मना कर दिया था अब उसे भी करें और वो भी कम दाम पर."

'एवेन्यू क्यू' में ट्रेकी मॉन्स्टर दिन भर कुछ नहीं करता है सिवाय पोर्न सर्च करने के. इसलिए अन्य किरदार तब हैरान रह जाते हैं जब वो बताता है कि वो करोड़पति है.

वो बताता है, "उतार चढ़ाव वाले बाज़ार में सबसे भरोसेमंद निवेश पोर्न है."

और एक बार फिर ट्रेकी मॉन्स्टर क़रीब क़रीब सही होता है, लेकिन उतना भी नहीं.

इतना तो तय है कि पोर्न में पैसा है.

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Image caption पोर्नेोग्राफ़ी में क्या सेक्स रोबोट की मौजूदगी बढ़ती जाएगी?

लेकिन इसमें पैसा बनाने का सही तरीक़ा है, उन तकनीक में निवेश करना जो एक दूसरे को आगे ले जाते हैं.

बीते ज़माने में फ़ोटो स्टूडियो, वीसीआर, हाई स्पीड मॉडम बनते थे, आज माइंडगीक का एल्गोरिदम है जो आइडिया बताता है.

ट्रेकी मॉन्स्टर का भविष्य का गाना क्या होगा? शायद, 'रोबोट्स आर फॉर पोर्न' यानी रोबोट पोर्न के लिए हैं.

टेक्नोलॉजी को विकसित करने में सेक्स की भूमिका अभी ख़त्म नहीं होने वाली है.

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