अपने बच्चों का क़त्ल करने वाली रूसी माँएं

  • 19 जुलाई 2019
रेखाचित्र

रूस में दर्जनों महिलाओं पर अपने बच्चों का क़त्ल करने के आरोप में मुक़दमा चलाया जा रहा है. अभियुक्तों में गृहणियों से लेकर बड़ी बड़ी मैनेजर तक हैं.

लेकिन यह समस्या सिर्फ़ रूस की नहीं है, मनोवैज्ञानिकों का अनुमान है कि अमरीका में चार में से एक माँ अपने बच्चे का क़त्ल करने के बारे में सोचती है.

दूसरे देशों की तरह रूस में एक संस्कृति है कि ज़िन्दगी जीने के लिए आपको कठोर होने की ज़रूरत है और ये सही है कि मानसिक बीमारी से सम्बंधित विषयों पर बात न की जाए आप सिर्फ़ अपनी ज़िन्दगी जिएं.

इन कहानियों से पता चलता है कि प्रसवोत्तर अवसाद अक्सर बिना निदान के चला जाता है या इसका इलाज नहीं किया जाता है, और अक्सर क़रीबी रिश्तेदार यह समझने में विफल रहते हैं कि क्या हो रहा है. जब तक यह समझ में आता है दुखद रूप से बहुत देर हो चुकी होती है.

टैबू

बीबीसी रूस के पत्रकार ओलेस्या गेरासिमेंको और स्वेतलाना रेइटर ने रूस में महिलाओं से बात कर यह पता लगाने की कोशिश की कि माँएं अपने बच्चों को क्यों मारती हैं.

उनकी जांच से पता चला है कि हमें मातृत्व के बारे में मिथकों को ख़त्म करने और टैबू को तोड़ने की ज़रूरत है और अधिकांश महिलाओं पर होने वाले भारी तनाव पर बातचीत करने की ज़रूरत है, ताकि बच्चों के क़त्ल की इस त्रासदी से बचा जा सके.

ल्योना

एल्योना, एक अर्थशास्त्री हैं, उन्हेंअपने पति प्योत्र के साथ ख़ुशी-ख़ुशी शादी की थी और वे बच्चा प्लान करने के लिए काफ़ी उत्साहित थे.

उन्होंने बच्चे के कपड़े और एक प्रैम ख़रीदे और वो पालन पोषण के बारे में जानकारी देने वाली क्लास लेनी शुरू कर दी. लेकिन किसी ने भी ये नहीं बताया कि जो महिला अभी नई नई माँ बनी हैं उन्हें किस तरह की मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समना करना पड़ सकता है.

बच्चे के जन्म के बाद, एल्योना को नींद काम आने लगी उन्होंने कहा कि वह इसका सामना नहीं कर सकती हैं.

यह पता चला कि वह पहले भी एक मनोवैज्ञानिक प्रकरण के दौर से गुज़री हैं, अब एक मनोचिकित्सक ने उसे कुछ दवा दी, जिससे उन्हें थोड़ी मदद मिली.

एक दिन प्योत्र घर आए और उन्होंने अपने सात महीने के बच्चे को बाथ-टब में मृत पाया और बाद में मॉस्को के शहर की एक झील में एल्योना को पाया. बच्चे को डूबाने के बाद उसने वोदका की एक बोतल पी ली थी, वो ख़ुद को भी डुबाना चाहती थीं, लेकिन इस बीच होश खो दिया.

अब वह ट्रायल पर हैं

व्याकुल, प्योत्र एल्योना के मामले की हर सुनवाई में जाते हैं और उन्हें पास बैठाकर सांत्वना देने की कोशिश करते हैं.

वो आश्वस्त हैं कि यह सब टाला जा सकता था यदि केवल किसी ने एल्योना को प्रसवोत्तर अवसाद के बारे में बताया होता.

वे कहते हैं, "उसे बीमारी नहीं थी, बस वह दिमाग़ी तौर से टूट चुकी थी."

"अगर उसे सही डॉक्टर दिखाया जाता या जब उसने मुझसे कहा था अगर मैं उसे अस्पताल ले जाता, तो ऐसा कभी नहीं होता".

रूसी क्रिमनलोजिस्ट ने बताया कि 80% महिलाएं अपने बच्चों को मारने से पहले डॉक्टर के पास सिरदर्द, नींद न आने या अनियमित मासिक धर्म की शिकायत लेकर गई थीं.

वे कौन है?

रूसी क़ानून में, माँ द्वारा अपने बच्चे के क़त्ल किए जाने के टैबू वाले इस जुर्म को फ़िलिसिड कहा जाता है.

2018 में रूस में 33 केस ऐसे भी सामने आए जिसमें भ्रूण हत्या और बच्चों को पैदा होते ही या दो साल के अंदर मार दिया गया.

कुछ क्रिमिनोलॉजिस्ट का अनुमान है कि इस तरह की आठ गुना अधिक घटनाएं हैं जो कभी अदालत में नहीं आती हैं.

फोरेंसिक मनोचिकित्सक और मॉस्को के सर्बस्की इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइकोस्ट्री के प्रमुख शोधकर्ता मार्गरिटा काचेवा कहते हैं, "हमारी महिला वार्ड में बीस बेड में से तीन या चार पर हर महीने उन माताओं का क़ब्ज़ा होता है, जिन्होंने अपने बच्चों को मार दिया है".

एक अकाउंटेंट, एक शिक्षक, एक बेरोज़गार महिला, एक सामाजिक कल्याण सलाहकार, एक वेट्रेस, एक डिजाइन स्कूल स्नातक, एक बड़े परिवार की मां, एक दुकान सहायक - तीस से भी ज़यादा जिन महिलाओं की कहानियों की जांच बीबीसी रूस की टीम द्वारा की गई थी, वे सभी अलग थीं.

रूढ़ियों के बावजूद, अपने बच्चों को मारने वाली कई महिलाओं के पति, घर, और नौकरी है उन्हें कोई लत भी नहीं होती है.

डॉक्टरों को पता है कि जन्म देने के बाद, मानसिक बीमारी अचानक तेज़ हो सकती है.

महिलाओं में एक पुरानी स्थिति हो सकती है जो दिन-प्रतिदिन के जीवन में नहीं दिखाती है, लेकिन तीन में से किसी भी घटना से उभर सकती है जो एक महिला के जिस्म को सबसे अधिक प्रभावित करता है - गर्भावस्था, बच्चा या रजोनिवृत.

'देखो, ऐसा लगता है कि मैंने बच्चे को मार डाला'

38 वर्षीय अन्ना एक शिक्षक हैं और उनके 18 और 10 वर्षीय बेटे चाहते हैं कि उनके माता पिता एक लड़की पैदा करें और उनके पैरेंट्स भी बहुत उत्सुक थे.

लेकिन सात जुलाई 2018 को, उन्होंने ख़ुद एम्बुलेंस का बुलाया, वह बच्चे के जन्म से पहले भयानक दर्द में थीं और हालात बिगड़ गए.

अन्ना को लगा कि वह सामना नहीं कर सकतीं. एक मनोवैज्ञानिक ने उन्हें आराम करने की सलाह दी. जब उनके पति मास्को में काम करने के लिए गए थे, उन्होंने एक दोस्त के साथ बच्चों को यह कहकर छोड़ दिया कि वह एक बिस्तर ख़रीदने जा रही हैं.

इसके बजाय, वह अपनी माँ की क़ब्र पर गईं, अगले दिन पुलिस अधिकारियों को वो एक शिशु के साथ नंगे पैर मिलीं और वो पुलिस को इसका कारण समझा नहीं सकीं.

उनकी सास उन्हें घर ले गईं और ऐसा प्रतीत होता है कि अन्ना ने उसी समय तकिये से बच्चे को दम घोंट कर मारने की कोशिश की. इस मामले कोर्ट में मुक़दमा चल रहा है.

जब सात जुलाई को एम्बुलेंस आई, तो अन्ना ने डॉक्टर से कहा, "देखो, ऐसा लगता है कि मैंने बच्चे को मार डाला".

डॉक्टर बच्चे को बचाने में कामयाब रहे और अन्ना अस्पताल में भर्ती थीं. वह क्रॉनिक सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित थीं.

डॉ काशेइवा के अनुसार, "आपको यह समझना होगा कि यह सिर्फ़ पागलपन नहीं है. एक महिला जिसने मानसिक रूप से बीमार होने के दौरान बच्चे को मार दिया है, वह पूरी तरह से सामान्य जीवन जी सकती है."

"हे भगवान, डॉक्टर, मैंने क्या किया है? अब मैं कैसे रहूं?"

21 साल की अरीना अपने 9वें फ्लोर के फ्लैट से अपने बच्चे को गोद में लेकर कूद पड़ी.

जब बच्चा पैदा हुआ था उनके पति सैन्य ड्यूटी पर थे. जब वह लौटे तो उन्होंने अपनी पत्नी को अवसाद अवस्था में पाया.

वह एक साल से अपने माता-पिता के साथ रह रही थीं. जिस दिन उन्होंने अपने बच्चे के साथ आत्महत्या करने का प्रयास किया, उससे पहले उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति उन्हें मारने के लिए चाक़ू तेज़ कर रहे हैं.

चमत्कारिक रूप से, माँ और बच्चा गिरने से बच गए और अरीना को अस्पताल ले जाया गया और वहाँ से पुलिस हिरासत में ले लिया गया.

मनोचिकित्सकों ने उनका सिज़ोफ्रेनिया का इलाज किया.

सिज़ोफ्रेनिया और अवसाद से ग्रस्त माताएं अक्सर अपने बच्चे को मारने के लिए समान कारण बताती हैं.

"यह उसके लिए बेहतर है, मैं इतनी बुरी माँ हूँ", "यह इतनी भयानक दुनिया है, बच्चे के लिए इस दुनिया में नहीं रहना बेहतर है".

डॉ कचेवा कहते हैं, "अपराध के बाद वे आराम नहीं पा सकती हैं और पहले, दूसरे या तीसरे प्रयास में ख़ुद को मार सकती हैं,".

वह बताती हैं कि महिलाओं को अक्सर उनकी संस्था में लाया जाता है जब परिवार में कोई व्यक्ति उन्हें समझने में कामयाब हो जाता है.

एक बार जब उन्हें उपचार दिया जाता है, तो छह महीने पूरी तरह से ठीक होने के लिए पर्याप्त होते हैं.

रूस में, जैसा कि अमरीका में है, अदालतें तय करती हैं कि उन माताओं को किस तरह की सज़ा दी जाए जिन्होंने अपने बच्चों को मार दिया है.

अगर फोरेंसिक मनोवैज्ञानिक मां को पागल नहीं पाते हैं, तो उन्हें लंबी जेल की सज़ा हो सकती है.

रूसी फोरेंसिक मनोचिकित्सकों द्वारा किए गए शोध से पता चलता है कि 80% महिलाएं जो कि भ्रूण हत्या करती हैं, ग़रीब परिवारों में पली-बढ़ी हैं और उनमें से 85% का विवाह में मतभेद हुआ था.

शोधकर्ताओं को इन आंकड़ों के बीच एक सीधा संबंध दिखाई देता है: झूठ, तर्क, झगड़े, आक्रोश और नशे की लत एक किशोर लड़की के जीवन का एक अविभाज्य हिस्सा बन जाता है और वयस्क महिलाओं को उनके स्वयं के परिवारों में पालन करता है.

माता-पिता के बीच ख़राब रिश्ते बच्चे के प्रति ग़ुस्से की वजह बनता है.

कचेवा कहते हैं, "घरेलू हिंसा का शिकार होना भविष्य में इस तरह के अपराधों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारक है".

"इनमें से अधिकांश महिलाओं को बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है - भावनात्मक रूप से, यौन या शारीरिक रूप से".

कई वकीलों ने उन महिलाओं का बचाव करने से इनकार कर दिया जिन्होंने अपने बच्चों को मार दिया है.

'मुझे लगा कि यह मेरे साथ कभी नहीं हो सकता'

"जेल प्रशासक आमतौर पर जेल के दूसरे क़ैदियों से इस बात को गुप्त रखते हैं कि उनके बीच शिशु हत्यारे सज़ा काट रहे हैं".

एक अभिनेत्री जिसे एक अलग अपराध के लिए सज़ा सुनाई गई थी, मरीना कलेशेवा कहती है.

"मैं निश्चित रूप से उनके बीच आई थी, कोई नहीं जानता कि वो यहां किस लिए आये हैं, शिविर में उनका कोई दोस्त नहीं है, वे बहुत शांत रहते हैं और अपने काम से काम रखते हैं " अगर वे किसी बहस में शामिल होते हैं, तो कोई उन्हें पीट सकता है".

मॉस्को के मनोवैज्ञानिक याकोव कोचेतोव का कहना है कि महिलाएं अपने घातक विचारों को नकारती हैं और बचाव के तौर पर दूसरों पर अपना ग़ुस्सा निकालती हैं.

"यदि आप एक महिला को समझने की कोशिश करते हैं और शायद उसके लिए करुणा महसूस करते हैं, तो आपको उन भावनाओं को पूरा करना होगा जो उसके पास है, और कोई भी उन भावनाओं को पूरा नहीं करना चाहता है".

एक बड़ी दूरसंचार कंपनी में कॉरपोरेट क्लाइंट्स के साथ काम करने वाले विशेषज्ञ 33 वर्षीय तातियाना कहते हैं, "मैं इस तरह की माताओं की निंदा करता था. मुझे लगता था कि मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हो सकता". "बिक्री, व्यापार यात्राएं, दोस्त, और मैं वास्तव में एक बच्चा चाहता था. मुझे लगा कि जितना ज़रूरी है हम उतना तैयार थे, लेकिन सब बदल गया "

"जन्म वास्तव में मुश्किल था, और दाइयां कठोर थीं. बाद में जब मुझे जन्म का वक़्त याद आता तो डरावने और दर्दनाक सपने आने लगे मैं घबराहट के साथ उठती मेरे दिल की धड़कन बढ़ी हुई होती मास्टिटिस, अल्सर, बढ़ते हुए वज़न, गिरते हुए बाल सभी ने मुझे अपने बच्चे के प्रति बढ़ते ग़ुस्से का एहसास कराया - जैसे उसने मेरी जिंदगी चुरा ली हो".

जब बच्चे के दांत निकल रहे थे वो रात को नहीं सोता था या रोता था तो लगा तातियाना टूट जाएगी.

"तुम एक माँ हो तुम नहीं हो? अगर दूसरे यह कर सकते हैं तो तुम क्यों नहीं कर सकती?

तातियाना याद करती हैं, "रोने से आपका सिर फट जाता है और अपने बचपन से सभी समस्याओं को सामने ले आता है," "मेरे पास यह विचार था कि मुझे हर चीज़ से निपटना था. मैं हिस्टेरिकल थी और मैंने बच्चे को ज़ोर से हिलाया जब मैं उसे सोने के लिए हिला रही थी वह घबरा गया और अधिक रोने लगा. फिर, अपनी पूरी ताक़त से मैंने उसे बिस्तर पर फेंक दिया और चिल्लाया, "बेहतर होता अगर तुम मर जाते", इससे भी बुरा और फिर मैं शर्म और अपराधबोध से भर गई कि मैं मातृत्व का आनंद लेने में असमर्थ थी".

तातियाना का कहना है कि उनके पति ने उन्हें बताया कि वह बच्चे को मनोवैज्ञानिक रूप से पाल रही थीं. उन्होंने यह कहते हुए अपनी शिकायतों को दूर कर दिया, "क्या आप एक माँ नहीं हैं? दूसरे यह क्यों कर सकते हैं और आप क्यों नहीं कर सकते? आपने पहली बार इस बच्चे को क्यों लिया?"

एक साल बीत गया और चीज़ें केवल बदतर होती गईं. आत्महत्या को ध्यान में रखते हुए तातियाना एक मनोवैज्ञानिक के पास गई. "मुझे लगा कि मेरे जैसी भयानक और वीभत्स माँ को पृथ्वी से मिटा दिया जाना चाहिए और मेरे बच्चे को एक बेहतर माँ की ज़रुरत है. मनोवैज्ञानिक रूप से मेरे लिए ख़ुद को मारना आसान होगा. मेरे ऐसी बहुत सी समस्याएं थी जिनका मनोवैज्ञानिक ने तुरंत जवाब दिया और मेरी मदद की.

रोकथाम

जब बालहत्या रोकथाम की बात उठती है, तो हम गर्भनिरोधक और बेबी-बॉक्स के उपयोग को प्रोत्साहित करने के बारे में बात करते हैं.

लेकिन रूसी और पश्चिमी डॉक्टरों ने माताओं में मनोवैज्ञानिक समस्याओं, विशेष रूप से प्रसवोत्तर अवसाद के लिए सतर्क होने के महत्व का उल्लेख किया है.

मनोवैज्ञानिक मरीना बिलोबराम कहते हैं, "जन्म से पहले आदर्श रूप से आप सभी संभावित परिदृश्यों पर विचार करेंगे, अपनी माँ के साथ अपने संबंधों पर चर्चा करें, आप अपने बारे में और अपने साथी के बारे में कैसा महसूस करते हैं और यह सोचें कि यह सब आपके राज्य को कैसे प्रभावित कर सकता है".

डॉ मार्गरीता कचेवा कहती हैं, "मुस्कराते हुए बच्चों के साथ केवल पोस्टर नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी सोचें कि यह कैसे हो सकता है".

डॉ मार्गरीता कचेवा कहती हैं, "मश्किल से जूझ रही महिलाओं के लिए मॉस्को और उन क्षेत्रों में हमारे केंद्र हैं. वे घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं और अवसाद से पीड़ित महिलाओं के लिए खुले हैं. वे आधे ख़ाली पड़े हैं क्योंकि महिलाएं डरती हैं कि अगर वे चली गईं और उन्होंने पानी बीमारी के बारे में बात की तो उनके बच्चों को उनसे दूर कर दिया जाएगा. वे स्थानीय मनोचिकित्सक के पास जाने के लिए भी इसी कारण से डरती हैं. अपने पति और परिवार से डरने की वजह से वो उन्हें भी नहीं बताती हैं और चुप रहती हैं".

(इस लेख के सभी नाम प्रभावित हुए बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए बदल दिए गए हैं.)

(सभी रेखचित्र तातियाना ओस्पेनिकोवा के हैं.)

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