लंबाई से तय होती है सैलरी, और क्या क्या होता है?

  • 8 अक्तूबर 2019
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पुरुषों के लिए लंबा होना वांछनीय माना जाता है, लेकिन एलन मोट औसत कनाडाई पुरुष की तुलना में क़रीब 18 सेंटीमीटर छोटे हैं और उन्हें अपनी लंबाई या कहें कम लंबाई से कोई शिकायत नहीं है.

क्या आपको कभी वैसा अनुभव हुआ है जब विपरीत सेक्स के लोग आपसे बेहद प्यार करते हों?

मैं जब भी स्कूल के प्लेग्राउंड में होता था, मैंने ऐसा ही महसूस किया. मेरे वहां पहुंचते ही, बड़ी उम्र की लड़कियां खुशी से झूम उठती थीं और तब तक मेरा पीछा किया करती थीं, जब तक मैं भागता रहता था. जब वे मुझे पकड़ लेतीं, सब मुझे गले से लगाती और गाल पर किस करतीं. तब जाकर मुझे खेलने का मौका मिलता या फिर कोई दूसरी लड़की मेरे पीछे भागने लगती.

मैं पांच साल का था और हर कोई मुझसे प्यार करना चाहता था. मैं कनाडा के अलबर्टा, के इडमोनटन के मी-या-नोह एलिमेंटरी स्कूल का सबसे छोटा बच्चा था. नर्सरी क्लास में मैं किसी डॉल की भांति नजर आता था.

उस छोटी सी उम्र में भी, मैं समझ गया था कि लोग मेरे साथ अलग ढंग से पेश आ रहे हैं क्योंकि मेरी लंबाई कम है. लेकिन मैं तब यह नहीं जानता था कि एक ही साल में लोगों का यह बर्ताव ग़ायब हो जाएगा और लोग मुझे कम चाहने लगेंगे.

जिस बच्चे से हर कोई प्यार करना चाहता था, उससे तब्दील होते हुए अब मैं क्लास का सबसे छोटा बच्चा बन चुका था. खेल के मैदान में बच्चे मुझे चिढ़ाने लगे तो मैं खेल के समय में लाइब्रेरियन की मदद करने जाने लगा.

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Image caption स्कूल के दिनों की तस्वीर

औसत लंबाई

इसका असर यह हुआ कि मैं स्कूल में पहले ही साल टॉप पर पहुंच गया, हालांकि यह कोई आदर्श स्थिति नहीं थी. मेरे लिए पूरी ज़िंदगी ऐसे ही जीने का विकल्प था.

वास्तविकता में, मेरे पास आनुवांशिक तौर पर ही दूसरा मौका नहीं था. मेरी मां की लंबाई 151 सेंटीमीटर थी, जबकि मेरे पिता की लंबाई 162 सेंटीमीटर. जो बाल रोग चिकित्सक मुझे देख रहा था उसका अनुमान था कि मेरी लंबाई 167 सेंटीमीटर होगी, अगर मैं खुशकिस्मत रहा तो हो सकता है कि मैं 172 सेंटीमीटर भी लंबा हो जाऊं.

कनाडा में पुरुषों की औसत लंबाई 172 सेंटीमीटर के आसपास ही है. लेकिन चिकित्सक का अनुमान सही नहीं निकला. 13 साल के बाद मेरी लंबाई बढ़नी बंद हो गई. मैं जीवन भर के लिए 157 सेंटीमीटर लंबा रह गया. यह मेडिकल तौर पर बौना घोषित किए जाने की आधिकारिक लंबाई से महज 10 सेंटीमीटर ही ज़्यादा है.

इसके बाद मैंने जो जीवन व्यतीत किया है, उसके आधार पर पश्चिमी देशों में कम लंबाई वाले किसी भी शख़्स के लिए मेरे पास दो निष्कर्ष हैं-

1. यह बहुत बुरा अनुभव है.

2. कोई भी इसके बारे में आपसे शिकायत नहीं सुनना चाहता है.

इसलिए इस विषय पर मैं चुप रहने लगा. कई लोग मुझसे कहते रहे हैं, "अरे, छोड़िए भी. लोग आपके साथ अलग ढंग से इसलिए नहीं पेश आते क्योंकि आपकी लंबाई कम है." (ऐसा जिन लोगों ने कहा उन सबकी लंबाई कम से कम 180 सेंटीमीटर रही है.)

लेकिन हमारे समाज में कम लंबाई वाले पुरुष होने की सच्चाई मैं जानता हूं. लंबाई को लेकर समाज में उतना ही भेदभाव मौजूद है जितना कि जेंडर, नस्ल और धर्म इत्यादि के आधार पर मौजूद है.

एक बार मैं फॉर्च्यून की ओर से जारी 500 शीर्ष कंपनियों की सीईओ की सूची देख रहा था . इसमें ज़्यादातर पुरुष ही थे, कुछ संख्या महिलाओं की भी थी. लेकिन अधिकांश पुरुष थे, जिनकी औसत लंबाई 182 सेंटीमीटर थी- यह औसत लंबाई थी, मतलब कई इससे भी लंबे थे.

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Image caption एलन मोट बीटल्स की मूर्तियों के साथ

लंबाई और वेतन में संबंध

एकसमान काम करने पर भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कम वेतन मिलता है, यह बात भी किसी से छुपी नहीं है. लोगों को यह भी जानना चाहिए कि वेतन में अंतर के लिए लंबाई भी प्रमुख कारक होता है.

आपको यक़ीन नहीं हो रहा होगा लेकिन मैलकम ग्लैडवैल की पुस्तक बिलिंक के मुताबिक, अनुमानत एक इंच यानी 2.54 सेंटीमीटर लंबे होने से आपको साल में 789 डॉलर अतिरिक्त वेतन मिलता है.

इसका सीधा मतलब यह है कि 182 सेंटीमीटर लंबा आदमी, एकसमान काम के लिए मुझसे 7,890 डॉलर सालाना ज़्यादा वेतन पाएगा. 40 साल लंबे करियर के हिसाब से देखें तो यह अंतर 3,15,600 डॉलर का होगा.

जब मैं यह पढ़ रहा था तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ था. क्योंकि मैं हमेशा से इस सच को जानता था. समाज कम लंबाई वाले लोगों को जो भी मिले, उसे स्वीकार करना सिखाता है. मुझे कोई नई नौकरी मिली और मुझे एक ख़ास सैलरी ऑफ़र की गई, तो मेरे मन में ऐसे विचार आएंगे, "मैं जो उम्मीद कर रहा था, उससे कम वेतन है. लेकिन ठीक है, मुझे लगता है कि ऑफ़र स्वीकार कर लेना चाहिए."

लेकिन कोई लंबा शख़्स को ज़्यादा सुविधाओं की मांग के साथ कह सकता है, "अरे नहीं, मुझे तो इससे 10 हज़ार ज़्यादा की ज़रूरत है."

आप कभी इंटरव्यू के लिए कमरे में गए हों और मूल्यांकन करके महज सेकेंडों में आपको ख़ारिज किया गया? कम लंबाई वाले शख़्स इस मनोभाव को अच्छी तरह समझते हैं. ऐसी जगहों पर हमें 'लिटिल नेपोलियन' जैसे घृणित शब्द सुनने को मिलते हैं, कामयाब होने की हमारी इच्छा को 'शार्ट मैन सिंड्रोम' कह कर ख़ारिज कर दिया जाता है. अगर 187 सेंटीमीटर लंबा कोई शख़्स खुद के लिए आवाज़ उठाता है तो उसे उसका आत्मविश्वास कहा जाता है लेकिन मेरी लंबाई के किसी शख़्स के लिए इसे मेरी असुरक्षा और ज़रूरत मान लिया जाता है.

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लंबाई के चलते भेदभाव

मैं मार्केंटिंग की नौकरी किया करता था. हमारी बातचीत मीटिंग्स में होती थी. मैंने कोई सलाह दी, लोगों ने उस पर ध्यान नहीं दिया, कुछ मिनटों के बाद ठीक वही सलाह किसी और ने दी. लोगों ने तुरंत कहा, "अरे हां, यह अच्छा आइडिया है."

मैंने पाया कि अपनी बात रखने के लिए मुझे संघर्ष करना पड़ता था लेकिन ऐसी स्थिति में लोग मुझे अति महत्वाकांक्षी और खीझ उत्पन्न करने वाले शख़्स के तौर पर देखते थे. मेरे आइडिया चाहे जितने भी अच्छे होते थे लोग उसकी उपेक्षा किया करते थे क्योंकि वे पहले से तय कर चुके थे कि मेरे पास कांट्रीब्यूट करने के लिए कुछ है ही नहीं.

मैंने अपने कई महिला सहकर्मियों और दोस्तों को भी इसी संकट से गुजरते देखा है, वे इस भेदभाव को लैंगिक भेदभाव के तौर पर देखती थीं. जबकि मैं अमूमन इस बात पर अचरज किया करता था कि इनमें से कितना भेदभाव में लंबाई के चलते हो रहा है?

कुछ मौकों पर मैंने खुद से भी पूछा कि क्या मैं असुरक्षित हूं. लेकिन मैं सोचता हूं, "क्या वे लोग हर किसी से ऐसे ही पेश आते होंगे?"

फिर एक ऐसी मीटिंग भी हुई जिसमें यह बात स्पष्टता के साथ सामने आई. यह एक सोच विचार वाला सेशन था और लोगों से प्रोजेक्ट के बारे में एक लाइन में एजेंडा तय करना था. मैं ने सुझाव दिया, "क्यों नहीं हम इस समस्या को दूसरे सिरे से पकड़ें?" क्रिएटिव डायरेक्टर ने तेजी से प्रतिक्रिया देते हुए मुझे शांत रहने को कहा.

इसके बाद मीटिंग रूम में शांति छा गई और उसे भी लगा कि यह सही नहीं था. मैं अपनी एक सहकर्मी की प्रशंसा करना चाहता हूं जिसने मेरे पक्ष में बोलते हुए कहा, "सहज और आराम से इस मीटिंग को जारी रखना बेहद मुश्किल है क्योंकि आपने अभी एलन को चुप रहने को कहा है."

दूसरे लोगों जब इसे स्वीकार किया तो मेरे उस संदेह की पुष्टि हुई जिसमें मुझे लगता था कि बिना किसी वजह के वह मेरे साथ ख़राब बर्ताव कर रहे थे.

कामकाजी दुनिया से अलग डेटिंग की दुनिया में कम लंबाई वालों को किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है?

सच्चाई यही है कि, कम लंबाई के चलते 10 में से आठ महिलाएं आपको पहली ही नजर में संभावित सेक्शुअल पार्टनर मानने से इनकार कर देंगी. दस में से बाक़ी बची दो महिलाएं भी बहाना बनाने से पहले आपको अपनी बात कहने के लिए कुछ ही मिनटों का वक्त देंगी.

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ठिगने पुरुषों के साथ महिलाओं का बर्ताव

जब मैं अपनी महिला दोस्तों से कहता कि महिलाएं ठिगने पुरुषों के साथ डेट करना नहीं चाहतीं तो हमेशा ही उनका जवाब होता था, "यह सही नहीं है. मैं शर्त लगा सकती हूं कि ढेरों महिलाएं होंगी जो कम लंबाई वाले पुरुषों से प्यार करती होंगी."

तब मैं पूछता था, "तुमने कभी ऐसे पुरुष को डेट किया?"

तो उनका जवाब होता था, "नहीं."

फिर मैं पूछता था, "तुम करोगी"?

इसके बाद एक असहज चुप्पी पसर जाया करती.

स्टीवन लेविट और स्टीफन डबनर की बेस्टसेलर किताब फ्रीकोनोमिक्स के मुताबिक, ठिगने पुरुषों के आनलाइन डेटिंग प्रोफ़ाइल को किसी भी समूह के मुक़ाबले सबसे कम रिस्पांस मिलता है.

मेरी ऑनलाइन डेटिंग प्रोफाइल पर साल में एक की औसत से रिस्पांस मिल रहा है और यह मेरे अपने व्यक्तित्व से बाधाओं से पार पाने जैसा है. निश्चित तौर पर इसके अपवाद भी होंगे जिसका जिक्र लोग करते हैं. जैसे कि मैंने बार बार ये सुना, "महिलाएं राजकुमार से प्यार करती थीं जबकि वह कम लंबाई के थे."

इसलिए अब मुझे आठ इंच एड़ी वाले जूते पहनकर अपना जीवन गुजारना है और म्यूज़िकल जीनियस बनना है जो अपनी पीढ़ी का सबसे महान लाइव परर्फ़ामर भी हो.

मैंने यह भी सुना है कि लंबी महिलाओं के सामने कम लंबाई वाले लड़के एकदम असहज हो जाते हैं. हालांकि मुझे लगता है कि लंबी महिलाओं को भी ऐसे ही अनुभवों का सामना करना होता है. मेरी लंबी महिला दोस्त रही हैं, जो हमेशा यही कहती थीं कि जिन लड़कों के साथ वे डेट कर रही हैं, 'वे हील्स वाली सैंडिल नहीं पहनने देते हैं' या फिर 'जब लोग हमारी तरफ देखते हैं तो वह बहुत सजग हो जाता है.' लेकिन मैं ऐसा नहीं हूं. अगर मेरी जीवन साथी की लंबाई 187 सेंटीमीटर हुई तो भी मेरे ऊपर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा.

बहुत सारे लोग अनजाने में लंबाई को ताक़त, बुद्धिमता और दबदबे से जोड़कर देखते हैं. इन सबका नतीजा ये होता है कि लंबे लोगों को ठिगने लोगों की तुलना में बेहतर नेतृत्वकर्ता मान लिया जाता है.

मैं स्वीकार करता हूं कि कभी कभी मुझे लगता है कि मैं ठिगने लोगों के जीवन कहीं ज़्यादा बदतर ढंग से देखता हूं. यानी जितना बदतर है उससे कहीं ख़राब. अगर स्कूली दिनों में मेरी लंबाई 15 सेंटीमीटर ज़्यादा हो जाती तो क्या मेरा जीवन आसन होता? शायद. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि जो जीवन मैं जी रहा हूं वह दुख और दर्द से ही भरा है.

मैं जो भी हूं वह अपनी लंबाई की बदौलत हूं. मेरी लंबाई ने ही मुझे जोख़िम लेते रहने के लिए तैयार किया जिसे मैं 'पैराशूट सिंड्रोम' कहता हूं.

किसी भी भयानक स्थिति में- चाहे मैं हर किसी की तरह भयभीत ही क्यों ना हो जाऊं लेकिन आमतौर पर मेरी प्रतिक्रिया यही होती है, 'मैं एयरोप्लेन के दरवाजे पर खड़ा हूं, चाहे तो बाहर कूद सकता है. इससे बुरा और क्या हो सकता है?'

एक बार जब मैंने नई नौकरी शुरू की थी, तब कंपनी ने अपने सभी कर्मचारियों के लिए कनाडा के इडमोंटन के नार्थलैंड्स कॉलिजियम में एक मीटिंग बुलाई. यह कॉलिजियम खेलकूद और म्यूज़िकल कंसर्ट का बड़ा केंद्र है. वहां एक परंपरा थी कि हर नए कर्मचारी को इस समारोह में हिस्सा लेकर शुरुआत करना पड़ता था. इस केंद्र में अमरीकी सिंगर ब्रूनो मार्स (मुझसे 8 सेंटीमीटर लंबे) को अपना परफॉर्मेंस देना था तो हमलोगों से उनका ही एक गाना गाने को कहा गया. स्टेज पर हर कोई बुदबुदा रहा था, "हम ऐसा नहीं करने वाले हैं". सब सिर झुकाए पांव हिला रहे थे.

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ठिगनेपन की उपलब्धियां

मैंने इससे पहले ब्रूनो मार्स का गाना जीवन में कभी नहीं सुना था, इसलिए मैंने उनके कुछ गानों के बोल को फ़ोन पर गूगल किया और माइक्रोफ़ोन पकड़ा. मैं ट्यून नहीं जानता था लेकिन मैंने कोरस में लॉक्ड आउट ऑफ़ हेवन कोरस में उन लोगों के लिए गाया जिनके साथ मुझे काम करना था. मैं यह सबके सामने करना चाहता था लिहाजा कंपनी के सीईओ मुझे मेरे पहले नाम से जानने लगे. मुझमें ऐसा करने का आत्मविश्वास इसलिए था क्योंकि मुझमें लोगों की उम्मीदों के पार जाने का संकल्प था. लोगों को उम्मीद रही होगी कि मैं भी शांत रहूंगा, पीछे छुपा रहूंगा लेकिन मैंने एयरोप्लेन से छलांग लगा दी और अच्छी बात ये रही कि मेरे पैराशूट ने अपना काम कर दिखाया.

मेरी लंबाई कम है, इसलिए भी मैं अब लेखक बन चुका हूं. जैसा कि मैंने बताया है कि ठिगने लोग जब बात करते हैं तो उनकी बातों को लोग गंभीरता से नहीं लेते. इसलिए मैंने अपनी बात कहने के लिए लेखन को जरिया बनाया.

यह मेरी दक्षता बन चुकी है. मैंने भूतों की कहानियां लिखनी शुरू कीं, मेरी किताबें बेस्टसलर सूची में शामिल नहीं हुई हैं लेकिन मैंने लोगों को उन्हें पढ़ते हुए देखा है और इससे मुझे बहुत अच्छा महसूस होता है.

जैसे जैसे मेरी उम्र बढ़ रही है, मुझे लगता है कि मैं अच्छा भी दिखने लगा हूं.

कुछ साल पहले मुझे एक नए रहस्य का पता लगा. मुझे हमेशा लगता था कि अपना मज़ाक़ उड़ाना मजेदार होता है लेकिन एक हाउस पार्टी में मुझे एक लड़का मिला, जिसने मुझसे कहा, "अगर तुमने अपने बारे में कोई और निगेटिव कमेंट किया तो मैं तुम्हें थप्पड़ लगाऊंगा."

इसके बाद मैंने फ़ैसला किया कि मैं जोक्स तो बनाऊंगा लेकिन इस बात पर बनाऊंगा कि मैं कितना सुंदर और हैंडसम हूं. मुझे मालूम हुआ कि यह लोगों को पसंद आ रहा है क्योंकि अच्छी और पॉजिटिव बातों पर वे मेरे साथ ही हंसते हैं. समाज के लोग ऐसा नहीं मानते हैं कि मैं हैंडसम हूं लेकिन मैं ज़ोर देकर कहता रहूंगा कि मैं कमाल का हैंडसम हूं.

मैं इंस्टाग्राम पर जो भी सेल्फ़ी डालता हूं, उसमें कैप्शन लिखता हूं- एक और हैंडसम दिन या फिर क्या आप इतनी खूबसूरती संभाल सकते हैं? अब मैं अपना मज़ाक़ नहीं उड़ाता हूं.

जब पीछे मुड़कर मैं अपनी कुछ शानदार उपलब्धियों को देखता हूं तो मुझे यह स्वीकार करना होगा कि अगर मैं कमाल का ठिगना होने के बजाए सामान्य इंसान होता तो यह सब हासिल नहीं कर पाता.

(इलनेए चोंग के किए कुछ इंटरव्यू के साथ)

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