लॉरेंट सिमॉन्स: नौ साल की उम्र में कर ली ग्रेजुएशन

  • 4 दिसंबर 2019
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Image caption लॉरेंट सिमॉन्स सबसे कम उम्र में ग्रेजुएशन करने वाले बन गए हैं

जब वो चार साल का था तब उसने प्राइमरी की पढ़ाई शुरू की लेकिन वो अपनी क्लास के बाक़ी बच्चों से पहले हाई स्कूल में पहुंच गया. सिर्फ़ हाई स्कूल ही नहीं महज़ नौ साल की उम्र में लॉरेंट सिमॉन्स ने कॉलेज की डिग्री भी हासिल कर ली है.

बेल्जियम में रहने वाले सिमॉन्स ने बाक़ी बहुत से बच्चों की तरह ही एक साल में प्राइमरी क्लास की पढ़ाई पूरी की. लेकिन इसके बाद तो उन्होंने जो किया वो किसी को बी चौंकाने के लिए काफ़ी है. प्राइमरी की क्लास पूरी करने के बाद अगले ही एक साल में उन्होंने दूसरी से छठी क्लास तक की पढ़ाई पूरी कर ली.

जब वो छह साल के थे वो हाई स्कूल में थे. इसके बाद उन्होंने ख़ुद को थोड़ा आराम दिया, लेकिन ज़्यादा वक़्त के लिए नहीं.

जब वो आठ साल के हुए तो उन्होंने छह महीने घर पर ही रहना तय किया. लेकिन छह महीने का यह आराम एक बड़े धमाल के लिए था. जैसे ही ये वक़्त बीत उन्होंने यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया. स्नातक करने के लिए.

नौ महीने के भीतर डिग्री हाथ में थी

अभी पढ़ाई करते हुए उन्हें सिर्फ़ नौ महीने ही हुए थे और दिसंबर का महीना आते ही उनके हाथ में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री थी.

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Image caption लॉरेंट सिमॉन्स कृत्रिम अंग बनान चाहते हैं

लेकिन उन्होंने ये कारनामा कैसे कर लिया, उन्हें ख़ुद भी नहीं पता. जब बीबीसी न्यूज़डे प्रोग्राम के लिए उनसे बात की गई और पूछा गया कि उन्होंने यह सब कैसे किया तो नौ साल के लॉरेंट का कहना था, "मुझे ख़ुद भी नहीं पता कि मैंने ये कैसे कर लिया."

इंजीनियरिंग, डॉक्टरी या फिर दोनों?

लॉरेंट को इस बात में बहुत रुचि है कि कैसे तकनीक इंसान के लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकती है. ग्रेजुएशन में उनका जो प्रोजेक्ट भी कुछ ऐसा ही था- एक दिमाग़ जो इलेक्ट्रिक चिप से जुड़ा हुआ हो.

ये चिप एक साथ कई हज़ार न्यूरॉन्स को गिन सकती थी और उनका आकलन कर सकती थी.

उनके परिवार में सभी डॉक्टर हैं और अब लॉरेंट भी उन्हीं की तरह डॉक्टरी में आगे बढ़ना चाहते हैं और पीएचडी करना चाहते हैं. लेकिन उनका मक़सद सिर्फ़ डिग्री जमा करना नहीं है.

नौ साल के लॉरेंट कहते हैं "मैं चाहता हूं कि मैं कृत्रिम अंग बना सकूं."

कृत्रिम अंग वो अंग है जो नेचुरल ना होकर इंसानों द्वारा बनाए जाएं. जो मानव शरीर के किसी हिस्से के ख़राब या निष्क्रिय हो जाने पर प्रतिरोपित हो सकें. वो चाहे दिल हो या किडनी . ऐसे में किसी अंग के प्रतिरोपण के लिए डोनर पर निर्भरता को ख़त्म किया जा सकेगा.

लॉरेंट अपने लक्ष्य को कम शब्दों में कुछ इस तरह बताते हैं, "मैं चाहता हूं कि ज़िंदगियों को लंबे समय तक बचाया जा सके."

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Image caption लॉरेंट सिमॉन्स के पिता का कहना है कि वो अपने बेटे के लिए बहुत खुश हैं

सबसे पहले उनकी इस क्षमता को पहचाना किसने?

लॉरेंट चाहते हैं कि वो कृत्रिम अंगों की मदद से लोगों को लंबी और बेहतर ज़िंदगी दे सकें.

वो कहते हैं, "मैं दूसरों की ज़िंदगी को बेहतर बनाना चाहता हूं. अपने दादा-दादी की भी ज़िंदगी को."

दरअसल ये उनके दादा-दादी ही थे जिन्होंने उनकी इस क्षमता को सबसे पहले पहचाना. जब लॉरेंट ने स्कूल जाना शुरू भी नहीं किया था तभी उन्होंने उनकी इस क्षमता को पहचान लिया था.

लॉरेंट के पिता अलेक्जेंडर सिमॉन्स कहते हैं, "लॉरेंट को उनके माता-पिता ने ही बड़ा किया है और उन्होंने ही सबसे पहसे नोटिस किया कि लॉरेंट में औरों से कुछ ख़ास है. उन्होंने इसके बारे में बात करनी शुरू की. हमें लगा जैसे लगभग सभी दादा-दादी अपने पोते-पोतियों को लेकर अति उत्साही और गौरव महसूस करते हैं, ये भी वैसा ही है. इसलिए हमने इस बात पर बहुत ध्यान नहीं दिया."

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Image caption लॉरेंट अपने दादा-दादी के साथ

लेकिन ये सबकुछ समझ पाना इतना आसान नहीं था

लेकिन जो बात लॉरेंट के दादा-दादी कह रहे थे, वही बात उनकी प्राइमरी स्कूल की टीचर ने भी कही. इसके बाद लॉरेंट के माता-पिता ने इसके पीछे की वजह जानने की कोशिश की. यहां तक कि जब उन्होंने विशेषज्ञों से इस बारे में बात की तो वे भी आश्चर्यचकित हो गए.

लॉरेंट की फ़ोटोग्राफिक मेमोरी बहुत तेज़ है. यानी अगर वो किसी चीज़ को देखता है तो वो उसे लंबे समय तक याद रहती है. इसके साथ उनका आईक्यू 145 है. लेकिन सिर्फ़ यही बातें उन्हें औरों से अलग नहीं बनातीं, इसके साथ ही वो चीज़ों का आकलन भी काफ़ी अच्छे से कर लेते हैं.

शुरुआती सालों में उन्हें गणित और विज्ञान के प्रति कुछ ख़ास लगाव था लेकिन वो भाषाओं को लेकर उतने उत्साही नहीं थे. उनके पिता बताते हैं कि शुरू-शुरू में तो उन्होंने स्कूल ना जाने की ज़िद भी की थी. लेकिन जब से उन्होंने विश्वविद्यालय जाना शुरू किया है वो हर चीज़ को व्यवस्थित तरीक़े से करने लगे हैं.

उनकी रोज़ाना की दिनचर्या बेहद व्यस्त है.

उनके पिता बताते हैं, "सोमवार को उन्हें कोर्स के बारे में शुरुआती बातें बताई जाती हैं, मंगलवार को वो पूरा दिन लैब में रहते हैं और बुधवार का दिन पढ़ाई के लिए. वो घर पर रहकर आठ घंटे तक पढ़ाई करते हैं. गुरुवार को वो फ़ैक्ल्टी से मिलने जाके हे और शुक्रवार को परीक्षा."

एक ओर जहां लॉरेंट को ये प्रक्रिया पूरी करने में सोमवार से शुक्रवार तक का वक़्त लगता है वहीं किसी भी आम विद्यार्थी को यह सबकुछ करने में नौ से 12 सप्ताह का वक़्त लगता है.

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Image caption लॉरेंट एक टीवी शो के दौरान

बचपन कहीं खोया नहीं है

लॉरेंट नौ साल की उम्र में ग्रेजुएशन कर चुके हैं लेकिन जब वो पढ़ाई कर रहे थे तो इस बात का पूरी ध्यान रखा गया कि उन्हें किसी भी तरह की असुविधा ना हो. इसलिए उन्हें ज़्यादातर समय एक अलग कमरा ही पढ़ने के लिए दिया गया ताकि वो अपने से उम्र में अधिक उन बच्चों से अलग रहे जो कर तो रहे स्नातक ही थे लेकिन सभी युवा थे.

लेकिन उनके पिता का कहना है कि वो अपने बचपन को भी पूरी तरह जी रहे हैं. उन पर कोई भी किसी भी तरह का दबाव नहीं है.

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Image caption लॉरेंट अपने पालतू कुत्ते के साथ बीच पर मस्ती करते हुए

वो अभी से काफ़ी मशहूर हो चुके हैं. इंस्टाग्राम पर उन्हें क़रीब 35 हज़ार लोग फ़ॉलो करते हैं.

वो अपने पालतू कुत्ते के साथ घूमती हुई अपनी तस्वीर पोस्ट करते हैं, तैराकी करती हुई तस्वीरें शेयर करते हैं. और वो मीडिया को दिए इंटरव्यू की तस्वीरें भी शेयर करते हैं.

लॉरेंट के पिता कहते हैं "वह अपने दोस्तों से अपने इंटरव्यू के बारे में भी खूब बातें करते हैं."

अद्भु है ये सबकुछ

मोज़ार्ट ने पांच साल की उम्र में म्यूज़िक कंपोज़ किया था. पिकासो जब नौ साल के थे उन्होंने अपनी पहली पेंटिंग पूरी कर ली थी. लेकिन एक सच ये भी है कि बहुत से बच्चे जब वयस्क होते हैं तो उनके भीतर की ये अद्भुत क्षमता खो जाती है.

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Image caption लॉरेंट सिमॉन्स खेलते हुए

तो क्या लॉरेंट कुछ अलग है?

उनके पिता कहते हैं "वो हमेशा वो करके दिखाता जो वो कहता है और वो हमेशा ऐसा करेगा."

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