अपने परिवार की कंपनी से दूर होना कितना मुश्किल?

  • एलिज़ाबेथ हॉटसन
  • बीबीसी वर्कलाइफ़
प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल

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प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल

एसेक्स के जॉर्डन बेकर बड़े होकर अपने परिवार की टेक्नोलॉजी लॉजिस्टिक कंपनी के प्रमुख बनते. उन्होंने 12 साल की उम्र में काम करना शुरू कर दिया था. वह फ़र्श साफ़ करते, फ़ोन कॉल के जवाब देते और पिता के साथ बिज़नेस के गुर सीखते.

लेकिन 2008 में 20 साल की उम्र में बेकर ने कंपनी छोड़ दी. वह कहते हैं, "आसान नहीं होता जब आपके पिता सिर्फ़ पिता नहीं, बल्कि बॉस भी हों."

"किसी निजी वजह से पिता नाराज़ हो सकते हैं जिसका असर पेशेवर माहौल पर पड़ता है. यह असहज करने वाली स्थिति होती है."

परिवार जटिल हो सकते हैं और जब आप परिवार के साथ काम करते हैं तो वह और भी जटिल हो सकता है.

बेहतरीन हालात में पारिवारिक कंपनियों में बदलाव, विस्तार और कंपनी के आदर्शों का संरक्षण आसान होता है, जैसा कि जापान की होशी रयोकन ने साबित किया है. 46 पीढ़ियों से एक ही परिवार इस कंपनी को चला रहा है.

रिटेल जायंट वॉलमार्ट समस्याओं से अछूता नहीं है लेकिन आज भी संस्थापक सैम वॉल्टन के वंशज क़रीब 50 फ़ीसदी हिस्से के मालिक हैं. परिवार में कोई विवाद हो भी तो ख़बरों में नहीं आ पाता.

फिर भी कई हाई-प्रोफ़ाइल उदाहरण हैं जहां रिश्ते ख़राब हुए. परिवार में विवाद के कारण ही स्पोर्ट्सवेयर के दो मशहूर ब्रांड- प्यूमा और एडिडास का जन्म हुआ.

सैमसंग में परिवार का झगड़ा और विरासत का संकट हुआ. ऑस्ट्रेलिया की अरबपति खनन कारोबारी गिना राइनहार्ट ने अपने परिजनों के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई लड़ी.

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हाल में ही प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल ब्रिटेन के शाही परिवार की वरिष्ठ सदस्यता से अलग हुए तो अनगिनत सुर्ख़ियां बनीं.

शाही परिवार से उनका अलगाव दूसरी कहानियों से ज़्यादा दिलचस्प हो सकता है, लेकिन पारिवारिक कंपनियों से अलग होकर नई राह पर चलना कोई नई बात नहीं है.

यह मुश्किल फ़ैसला होता है, क्योंकि वहां भावनात्मक मुद्दे जुड़े होते हैं. तो वह क्या चीज़ है जो लोगों को ऐसा करने के लिए प्रेरित करती है और क्या अलग होने का कोई 'अच्छा' तरीक़ा है?

तनाव और होड़

दुनिया भर की दो-तिहाई कंपनियां परिवार में चलती हैं. उनमें काम करने के कई फ़ायदे हो सकते हैं, लेकिन शिकागो की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर जेनिफ़र एम. पेंडरगास्ट इन कंपनियों को तनाव बिंदुओं पर ध्यान देने की सलाह देती हैं.

"सभी चाहते हैं कि वे आपके कारोबार को जानें. यदि आपके पास कोई तर्क है तो मुमकिन है कि परिवार के बाक़ी लोगों को उसके बारे में पता हो और वे (समर्थन या विरोध) पक्ष लें. कल्पना कीजिए कि आप घर जाते हैं और आपके बॉस डिनर टेबल पर बैठे मिलते हैं."

2014 की फ़ैमिली बिज़नेस सर्वे रिपोर्ट में प्राइसवाटरहाउस कूपर्स ने लिखा था कि रिश्तों के साथ काम करना विश्वास और प्रतिबद्धता का उच्च स्तर पैदा कर सकता है.

लेकिन यह तनाव, नाराज़गी और खुले संघर्ष की ओर भी ले जा सकता है, क्योंकि लोगों को दिल और दिमाग़ अलग रखने और कारोबार एवं परिवार दोनों को सफल बनाने में मुश्किल होती है.

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ग्लोबल स्पोर्ट्सवीयर ब्रांड एडिडास और प्यूमा दो जर्मन भाईयों ने शुरु किया था. दोनों ने अपने परिवार का जूतों का बिज़नेस छोड़ अपनी नई शुरुआत की थी.

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

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ऑस्ट्रेलिया में 70 फ़ीसदी कंपनियां परिवार के स्वामित्व में हैं. लेखा कंपनी KPMG ने पाया कि उनमें झगड़े के मुख्य कारण हैं- संचार शैली, भविष्य की रणनीति और परिवार और बिजनेस की ज़रूरतों के बीच संतुलन.

समस्या क्षेत्रों के प्रति पीढ़ियों के नज़रिये अलग हैं. जैसे- भविष्य में बिजनेस संभालने वाले 21.8 फ़ीसदी लोगों का मानना है कि संचार शैली झगड़े का मुख्य कारण है. लेकिन अभी नेतृत्व संभाल रहे सिर्फ़ 13.3 फ़ीसदी लोग ऐसा मानते है.

पीढ़ियों के बीच के मसलों के अन्य प्रभाव हो सकते हैं. पेंडरगास्ट का कहना है कि बचपन की चीज़ों से निकल पाना आसान नहीं होता. आप वैसे ग़लतियों से आगे नहीं बढ़ पाते जिनको लोग हमेशा याद रखते हैं.

सगे भाई-बहनों में अक्सर तुलना की जाती है, जबकि चचेरे-ममेरे भाई-बहनों में ऐसा नहीं होता.

जेरेमी वाउड ने ओसीएस ग्रुप में 20 साल तक काम किया. इस फ़ैसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी को उनके परदादा फ्रेडरिक गुडलाइफ़ ने शुरू किया था. वाउड ने इसे छोड़कर एक प्रतिद्वंद्वी कंपनी बनाई.

"मैं कंपनी के फ़ैसिलिटी मैनेजमेंट का मैनेजिंग डायरेक्टर था. वहां कुछ पुनर्गठन होने वाला था. ऐसा लग रहा था कि मेरे ज़िम्मे का काम भविष्य की योजना में फिट नहीं होने वाला था, इसलिए मैंने अलग होने का फ़ैसला किया."

वाउड का कहना है कि परिवार के कई सदस्यों के शामिल होने का मतलब था कि सतह के नीचे तनाव अक्सर बुलबुलाती रहती थी.

"एक समय परिवार के 15 लोग उस बिज़नेस में थे- चाचा, चचेरे भाई-बहन, भाई... बड़े परिवार के तनाव और प्रतिद्वंद्विता से आपका सामना होता है. शेयरहोल्डिंग की राजनीति होती है और देखना होता है कि सत्ता कहां निहित है."

सन् 2000 में जब उन्होंने अपनी फ़ैसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी इन्सेन्टिव एफ़एम लॉन्च की तो नाराज़ परिवार वाले कोर्ट चले गए. वाउड पर ग्राहकों को तोड़ने के आरोप लगाए. अपनी कंपनी खड़ी करने में उनको कई साल कड़ी मेहनत करनी पड़ी.

"पहले मैंने सोचा था कि नये सिरे से शुरुआत करना आसान होगा, लेकिन मुझे अहसास हुआ कि कर्ज़ देने वाले उत्सुक नहीं थे क्योंकि पीछे कोई संपत्ति नहीं थी."

"हमने बैंक से एक छोटी रक़म उधार ली और 2002 में हमारा बिज़नेस शुरू हुआ. हमें एकदम शून्य से शुरुआत करनी पड़ी और धीरे-धीरे इसे खड़ा किया."

पेंडरगास्ट के मुताबिक़ वाउड का तजुर्बा अनोखा नहीं है. परिवार का कोई जब सदस्य बिज़नेस छोड़ता है तो भावनाएं ज़ोर मारती हैं. परिवार के लोग इसे निजी तौर पर ले सकते हैं.

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वॉलटन रिवार दशकों से अमरीकी रीटेल चेन वॉलमार्ट चला रहा है.

पारदर्शिता क्यों अहम है?

35 साल के माउरो ब्रूनी को अपनी पारिवारिक कंपनी छोड़ने में कई साल लग गए. न्यूयॉर्क के बेडफ़ोर्ड में पिता की हीटिंग एंड प्लंबिंग कंपनी ब्रूनी एंड कैंपिसी में होते तो वह कंपनी के प्रमुख बनते.

उन्होंने 12 साल तक मार्केटिंग और ग्राफ़िक डिज़ाइन विभाग में काम किया, लेकिन उन्हें आइस स्केटिंग का भी शौक़ था.

कई साल तक वह दोनों करते. आइस डांस शो में शरीक होने के लिए वह दुनिया भर में जाते और वहां से कंपनी के लिए काम भी करते.

आख़िरकार 2019 में ब्रूनी ने पेशेवर आइस स्केटिंग एंड इवेंट्स कंपनी हाउस ऑफ़ माउरो बनाई और पिता की कंपनी से अलग हो गए.

"मेरे पिता को मालूम था कि मेरा पहला प्यार स्केटिंग है. जब मैंने उनकी नौकरी छोड़ी तो उन्होंने बहुत समर्थन दिया और मुझे नई कंपनी बनाने में मदद की."

संयोग से उनके भाई पारिवारिक कंपनी को चलाने के लिए तैयार थे. "वह पिछले कुछ साल से काम कर रहा था, ज़्यादा ज़िम्मेदारियां उठा रहा था और पापा की भूमिका को निभाने के लिए तैयार था."

ब्रिटेन के इंस्टीट्यूट ऑफ़ लीडरशिप एंड मैनेजमेंट की रिसर्च, पॉलिसी एंड स्टैंडर्ड की प्रमुख केट कूपर का कहना है कि ब्रूनी का निकलना आसानी से हो गया. लेकिन कुछ कंपनियों के पास कोई योजना नहीं होती.

"कंपनियों को अपना जोखिम प्रबंधन करके रखना चाहिए. अप्रत्याशित हालात के लिए उनको योजना बनाने की ज़रूरत है."

क़ानूनी मसले भी लोगों को बाहर कर सकते हैं. लंदन की सिटी लॉ फ़र्म की सीईओ कैरेन होल्डेन का कहना है कि पारिवारिक व्यवसायों में भरोसे की वजह से अहम क़ानूनी औपचारिकताओं को नज़रअंदाज़ किया जाता है.

"जब सभी लोग ख़ुश होते हैं तो क़ानूनी दस्तावेज़ बनाने की नहीं सोचते. हाथ मिलाने और मौखिक वादे पर ही एतबार कर लेते हैं. लेकिन जब चीज़ें बिगड़ जाती हैं तो समझौते को साबित करने वाले काग़ज़ात नहीं होते."

पेंडरगास्ट का कहना है कि अलगाव के बारे में सावधानी से बात करना ही मनमुटाव से बचने का सबसे बेहतर तरीक़ा है.

"सबसे अच्छा है कि आप क्यों छोड़ रहे हैं इस बारे में पारदर्शी रहें- लेकिन यह पेशेवर तरीक़े से होना चाहिए. मिसाल के लिए, मैं अपनी दिलचस्पी के मुताबिक़ दूसरा काम करना चाहता हूं."

व्यावहारिक रूप से भावनाओं से ऊपर उठकर अलगाव को बेहतर तरीक़े से मैनेज करना अच्छा होता है.

"करियर के लिए बेहतर है कि आप संबंधों को न बिगाड़ें. पारिवारिक कारोबार में यह और ज़रूरी होता है क्योंकि उनसे ज़िंदगी भर आपका वास्ता रहने वाला है."

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रूपर्ट मर्डोक अपने बेटों लचलान और जेम्स के साथ

'अपने महल का राजा'

पारिवारिक कंपनी छोड़ने का हर फ़ैसला अटल नहीं होता. मर्डोक परिवार इसकी मिसाल है.

रूपर्ट मर्डोक के बेटे लचलान 2006 में अपनी ख़ुद की कंपनी बनाने के लिए अलग हो गए थे, एक दशक बाद उनकी वापसी हुई.

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में डेबोरा एकिन्स ने अपने परिवार के स्विमिंग पूल डिजाइन बिज़नेस को संभालने के लिए आंशिक रूप से वापसी की.

29 साल की एकिन्स कहती हैं, "पारिवारिक कारोबार से अलग होने को मैं ब्रेक-अप जैसा मानती हूं. आपको मालूम है कि कुछ अच्छा नहीं है फिर भी आप उससे प्यार करते हैं और उसका भला चाहते हैं."

"पाँच साल बाद मैं चली गई थी क्योंकि मुझे लगा था कि मैं अपने हिसाब से कारोबार नहीं चला पाऊंगी और मैं ख़ुद का कुछ करना चाहती थी."

उनके लिए यह फ़ैसला भावुक था, लेकिन उन्होंने संबंधों को पूरी तरह कभी नहीं तोड़ा. "अब मैं फ्रीलांस ऑनलाइन कंटेंट बनाती हूं. परिवार की कंपनी मेरे ग्राहकों में से एक है. लेकिन उनको कोई वरीयता नहीं मिलती, सबसे पहले उन्हीं को बिल मिलता है."

एकिन्स अपने परिवार के साथ काम करना पसंद करती थी, लेकिन वह अपने रास्ते पर चलकर ज़्यादा ख़ुश हैं.

वाउड की बात करें तो अपनी कंपनी बनाने का उनका संघर्ष सफल रहा. उनका कारोबार आज सालाना करोड़ों पाउंड का हो गया है. उनको किसी बात का पछतावा नहीं है.

जॉर्डन बेकर के पिता पहले बहुत निराश हुए थे लेकिन फिर मददगार बन गए. अब वह लंदन में अपनी मार्केटिंग एजेंसी चलाते हैं और अपनी आज़ादी को बहुत अहमियत देते हैं.

"पारिवारिक कारोबार अपने आप में एक ईकाई हो सकता है, जैसे परिवार का कोई सदस्य एक ईकाई होता है. मैं अपने महल का राजा बनना चाहता था."

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