भारत से ब्रिटेन का सफ़र, ऑटो रिक्शा से

  • 24 सितंबर 2016
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ऑटो से दुनिया की सैर
Image caption भारत से ब्रिटेन पंहुचने में इस ऑटो रिक्शे को सात महीने लग गए

कोई आपसे कहे कि वह भारत से ब्रिटेन ऑटो रिक्शा से चला गया तो आपको यक़ीन होगा? भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियन नागरिक नवीन रबेली ने 9,978 किलोमीटर की दूरी सौर ऊर्जा से चलने वाले ऑटो रिक्शा से तय कर ली.

Image caption अपने ऑटो रिक्शे में नवीन रबेली

रबेली का कहना है कि उन्होंन बिजली और सौर ऊर्जा से चलने वाली गाड़ियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए यह काम किया.

इस ऑटो में एक बिस्तर, बैठने की जगह, सौर ऊर्जा से चलने वाला चूल्हा और खाने पीने की चीजें रखने की जगह बनी हुई है.

Image caption नवीन रबेलो, इंजीनियर

फ्रांस में थोड़ी देर के लिए सफ़र रोक देना पड़ा, क्योंकि रबेली के साथ लूटपाट की गई.

रबेली ने बीबीसी से कहा, "जिस तरह लोगों ने पूरे रास्ते मरी मदद की और यहां तक पंहुचने में मेरा साथ दिया, मैं लोगों को वह बताना चाहता हूं."

Image caption ऑटो रिक्शे के ऊपर लगा सौर ऊर्जा पैनल

वे इसके आगे कहते हैं, "लोगों को ऑटो रिक्शा पसंद है. उन्होंने मेरे साथ सेल्फ़ी ली. मैंने जब बताया कि इस गाड़ी को पेट्रोल की ज़रूरत नहीं है, लोगों को यक़ीन ही नहीं हुआ."

रबेली का सफ़र बेंगलुरू से शुरू हुआ. वे वहां सड़क जाम में फंस गए और देखा कि कई ऑटो ढेर सारा प्रदूषण फैला रहे हैं. उनके मन में विचार आया कि इस प्रदूषण को कम करने के लिए कुछ न कुछ करना ही पड़ेगा.

Image caption सौर ऊर्जा से चलने वाला ऑटो लंदन में

उनका यह ऑटो पहले ईरान पंहुचाया गया. नवीन वहां से इसे चलाते हुए तुर्की, बुल्गारिया, सर्बिया, ऑस्ट्रिया, स्विटज़रलैंड, जर्मनी और फ्रांस होते हुए लंदन पंहुच गए.

वे कहते हैं, "अक्षय ऊर्जा के बारे में सोचना ही पड़ेगा, हम आख़िर कब तक पेट्रोल और डीज़ल जलाते रहेंगे?"

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