अफ़गानिस्तान से आए दिल्ली के चेस चाचा
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अफ़ग़ानिस्तान से आए दिल्ली के चेस चाचा

  • 10 मार्च 2018

अफ़गानिस्तान से अपना ख़ास चेस बोर्ड लेकर आए अब्दुल समद भारत में शरणार्थी हैं. शतरंज का शौक़ ऐसा कि एक दिन भी उसके बग़ैर नहीं गुज़रता.

दिल्ली के भोगल इलाक़े में रहते हैं. रोज़ मेट्रो ट्रेन पकड़कर कनॉट प्लेस जाते हैं और दिन भर अनजान लोगों के साथ शतरंज खेलते हैं.

उनके साथ खेलने वालों का कहना है कि उन्हें हराना मुश्किल है.

भारत के खाने में छोले, राजमा, दाल और मिक्स्ड वेज पसंद करने वाले समद को आगरा का ताजमहल बहुत सुंदर लगा.

साफ़ हिंदी बोलने वाले अब्दुल समद पुरानी हिंदी फ़िल्मों और गानों के मुरीद हैं.

'अमिताभ भाई' और 'धर्मेंद्र भाई' की फ़िल्म 'शोले' उन्हें बेहद पसंद है

साथ ही वे 1983 में आई फ़िल्म 'रज़िया सुल्तान' के गाने 'ऐ दिल-ए-नादां' के भी बहुत बड़े प्रशंसक हैं.

रिपोर्टिंग: प्रज्ञा मानव

शूट/एडिट: देबलिन रॉय

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