'भारत में लोकतंत्र कामयाब नहीं होगा'
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'भारत में लोकतंत्र कामयाब नहीं होगा'

''यहां (भारत में) जनतंत्र कामयाब नहीं हो सकता क्योंकि यहां की सामाजिक व्यवस्था, संसदीय लोकतंत्र के प्रारूप से मेल नहीं खाती.''

ये किसी और का नहीं बल्कि स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री और भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार रहे डॉ भीमराव आंबेडकर का बयान है.

जून, 1953 में उन्होंने बीबीसी को दिए एक बेहद विस्फोटक इंटरव्यू में ये बातें बड़ी साफ़गोई से कही थीं. भारत की चुनौती: क्या लोकतांत्रिक प्रयोग कामयाब रहेगा? इस ख़ास

सिरीज़ में बीबीसी भारत के नए जन्मे लोकतंत्र की समीक्षा कर रहा है. और इसी में आंबेडकर से हुई ख़ास बातचीत भी शामिल है.

भारतीय लोकतंत्र में डॉ आंबेडकर की अहम भूमिका रही है, ख़ास तौर से देश का संविधान रचने में. साल 1951 में वो जवाहरलाल नेहरू की अंतरिम सरकार में कानून मंत्री भी बने लेकिन नेहरू पर आरोप लगाते हुए पद से इस्तीफ़ा दे दिया. उनका इल्ज़ाम था कि नेहरू ने वंचित समुदायों के लिए पर्याप्त कोशिशें नहीं कीं.

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