जब सिखों को देखकर डरते थे चीन के लोग
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जब सिखों को देखकर डरते थे चीन के लोग

  • 12 अगस्त 2018

काम और बेहतर मौकों की तलाश में सिख दुनिया के कोने-कोने में गए हैं. साल 1884 में सिख शंघाई पहुंचे.

शंघाई के रहने वाले छाओ यिन बीज़िंग के शिंघुआ विश्वविद्यालय में आधुनिक भारतीय इतिहास और भारत-चीन संबंधों के बारे में पढ़ाते हैं.

पिछले साल उन्होंने शंघाई के सिखों पर एक किताब लिखी - फ़्रॉम पुलिसमैन टू रेवोल्यूशनरीज़, सिख डायस्पोरा इन ग्लोबल शंघाई.

ये किताब उन सिखों की कहानी है जो 1884 में पंजाब से शंघाई पहुंचे, कैसे उन्हें शंघाई पुलिस फ़ोर्स में नौकरी मिली और किन परिस्थितियों में उन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शंघाई छोड़ना पड़ा.

देखें, बीबीसी संवाददाता विनीत खरे की रिपोर्ट.

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