धंधा पानी
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धंधा पानी: आखिर क्यों गिर रहे हैं शेयर बाजार?

  • 15 सितंबर 2018

भारत में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी ग्रोथ 8.2 फ़ीसदी है और ये दो साल में सबसे अधिक है . शेयर बाज़ारों के लिए इस ख़बर में कोई दम नहीं था. निवेशकों का ज़ोर ख़रीदारी के बजाय बेचने पर है. आखिर क्यों गिर रहे हैं शेयर बाजार?

रुपया दिन पर दिन गिरावट के नए रिकॉर्ड बना रहा है और अब तो ये भी कहा जा रहा है. रुपये में गिरावट से भारत का चालू खाता घाटा यानी कैड जीडीपी का 2.5 से 2.8 फ़ीसदी तक रह सकता है और इसकी वजह है तेल कीमतों में उछाल.

डॉलर का सताया सिर्फ़ भारत ही हो ऐसा नहीं है. तुर्की, मिस्र, अर्जेंटीना और इंडोनेशिया में भी बढ़ता कैड चिंता का सबब बना हुआ है.

तेल में उबाल ने रुपये और बॉन्ड्स दोनों की सेहत बिगाड़ दी है. भारत अपनी कुल ज़रूरत का तकरीबन 70 फ़ीसदी तेल आयात करता है और ज़ाहिर के इसका अधिकतर पेमेंट उसे डॉलर में करना होता है. सरकार ने पेट्रोल, डीज़ल पर सब्सिडी खत्म कर दी है, इसलिए देश में भी पेट्रोल, डीज़ल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. अब पेट्रोल-डीज़ल महंगा तो ढुलाई भी महंगी, यानी महंगाई बढ़ना भी तय है.

बाज़ार का सेटिंमेंट इन ख़बरों से भी बिगड़ गया कि सरकार की देनदारियां बढ़ रही हैं. मार्च के आखिर तक जहाँ सरकार पर कुल देनदारी 77.98 लाख करोड़ थी, वहीं जून के आखिर में ये बढ़कर 79.8 लाख करोड़ रुपये हो गई.

भारतीय शेयर बाज़ारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों का दखल बहुत अधिक है. ट्रेड वार के बाद बने हालात में उनका उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर भरोसा कम हुआ है.

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