आंखों की रोशनी ना होने के बावजूद दुनिया देखने के अपने सपने को पूरा करने निकला है एक शख़्स

आंखों की रोशनी ना होने के बावजूद दुनिया देखने के अपने सपने को पूरा करने निकला है एक शख़्स

आंखों की रोशनी चली जाए तो पूरी ज़िंदगी अंधेरी लग सकती है. दिव्यांशु के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ पर उन्होंने दूसरों की ज़िंदगी रौशन करने का फैसला किया. जिन मुश्किलों से होकर वो गुज़रे दूसरों के लिए उसका हल निकाल लिया.

और जिस तरह की ज़िंदगी वो बिन आंखों के भी जी रहे हैं वैसी ही ज़िंदगी जीने का फलसफ़ा भी अपने जैसे कईयों को सिखा रहे हैं.

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