क्या दिवाली पर सोना ख़रीदना फ़ायदे का सौदा है?
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धंधा पानी: इस दिवाली गोल्ड को ऐसे करें 'बोल्ड'

  • 3 नवंबर 2018

कहने की ज़रूरत नहीं कि भारत में सबसे अधिक क्रेज गोल्ड का है. बस मौके का इंतज़ार रहता है, चाहे धनतेरस हो, नवरात्रे हों, दिवाली हो, करवाचौथ, किसी का जन्मदिन या फिर सालगिरह. तोहफ़े में देने के लिए गोल्ड को बेस्ट मानने वालों की कमी नहीं है.

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में घरों में सोना यानी हाउसहोल्ड गोल्ड तकरीबन 24 हज़ार टन है और इसकी कीमत 58 हज़ार अरब रुपये से अधिक की है.

दुनिया में सोने का उत्पादन करने वाले 5 सबसे बड़े देशों में चीन, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और रूस हैं. भारत में सोने की डिमांड और खपत तो ज्य़ादा है, लेकिन देश में सोने का उत्पादन ज्यादा नहीं होता. हालांकि भारत में सोने की खपत दुनिया में सबसे अधिक 28 फ़ीसदी है और चीन 26 फ़ीसदी के साथ दूसरे नंबर पर है. डिमांड पूरी करने के लिए अधिकतर गोल्ड इंपोर्ट करना पड़ता है. कुल इंपोर्ट में गोल्ड का हिस्सा 15 से 16 प्रतिशत तक है और ये लगातार बढ़ता जा रहा है.

गोल्ड का भंडारण करने में भारत भी पीछे नहीं है और दुनिया के चोटी के दस देशों में शामिल है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के जून 2018 के आंकड़ों के मुताबिक सोने के भंडार के मामले में अमरीका का केंद्रीय बैंक नंबर एक पर है. इसके पास 8000 टन से अधिक गोल्ड है. चीन के पास 1842 टन सोना है और वह इस रैंकिंग में छठे नंबर पर है. भारत 10वें नंबर पर है. भारतीय रिज़र्व बैंक के पास 560 टन से अधिक का सोना है. इस रैंकिंग में जर्मनी दूसरे, इटली तीसरे, फ्रांस चौथे और रूस पाँचवें स्थान पर है.

हिंदुओं में धनतेरस और दिवाली पर सोना-चांदी की खरीद का चलन काफी पुराना है. लेकिन क्या सुनार या ज्वैलर्स से गोल्ड ख़रीदना ही लोगों के पास एकमात्र और मुनाफ़े वाला विकल्प है. जवाब है नहीं,

अगर आप भी सोना खरीदना चाहते हैं तो इसे पेपर या फिजिकल तरीके से खरीदा जा सकता है.

फिजिकल तरीके से मतलब ज्वैलरी, सोने के बिस्कुट और गोल्ड क्वाइन हैं. जाहिर है ये आपको ज्वैलर्स की दुकान पर मिलेंगे.

वहीं पेपर गोल्ड का मतलब गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेट फंड (ईटीएफ) और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड है.

एक नज़र सोने में निवेश के तरीकों पर

ज्वैलरी- सोने के गहनों के शौकीन ज्वैलरी ख़रीद सकते हैं. ये सच है कि अधिकतर लोग दूसरे तरीकों से निवेश करने की बजाय ज्वैलरी खरीदते हैं. हालांकि, ज्वैलरी के साथ एक जोखिम है कि इसके चोरी होने और पुराने होने का डर हमेशा रहता है.

डिजिटल गोल्ड- सोना खरीदने के लिए ज्वैलर्स की शॉप पर जाने की जरूरत भी नहीं है. आप यह ज्वैलरी, सोने के सिक्के और बार ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं. कुछ मोबाइल वॉलेट और वेबसाइट पर डिज़िटल गोल्ड मिलता है.

गोल्ड क्वाइन स्कीम- सरकार ने अशोक चक्र और महात्मा गांधी की तस्वीर वाले सिक्के जारी किए हैं. ये सिक्के 5 और 10 ग्राम में उपलब्ध हैं. इन सिक्कों को रजिस्टर्ड एमएमटीसी आउटलेट, बैंकों और पोस्ट ऑफिस के जरिए खरीदा जा सकता है.

गोल्ड सेविंग स्कीम- इसमें एक निश्चित अवधि के लिए हर महीने तय रकम जमा करनी होती है. निश्चित अवधि खत्म होने के बाद जमा किए गए मूल्य के बराबर सोना खरीद सकते हैं.

गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेट फंड (र्इटीएफ)- इसमें किया गया निवेश स्टॉक एक्सचेंज की तरह होता है. ईटीएफ के मूल्य में उतार-चढ़ाव सोने की कीमतों पर निर्भर होता है. इसमें निवेश के लिए ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट होना जरूरी है. इसमें एकमुश्त या सिप के जरिए पैसा लगाया जा सकता है.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड:- यह बॉन्ड सरकार समय-समय पर जारी करती है. सरकार 2-3 महीने में इन्हें जारी करने के लिए विंडो ओपन करती है जो एक हफ्ते तक खुली रहती है.

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