अफ़ग़ान संघर्ष का क्रूर चेहरा
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अफ़गानिस्तान जंग में हो रही मौतों पर बीबीसी की ख़ास पड़ताल

  • 18 सितंबर 2019

तालिबान और अमरीका के बीच 18 साल पुरानी जंग ख़त्म करने के लिए चल रही बातचीत के नाकाम होने के बाद अफ़ग़ानिस्तान नए संकट का सामना कर रहा है.

इस बातचीत के आख़िरी दिनों में बीबीसी ने हिंसा की हरेक घटना की तहक़ीक़ात की.

अगस्त में हुई इन घटनाओं का डेटा बताता है कि अफ़ग़ानिस्तान की जंग पहले से कहीं अधिक घातक है और देश के तक़रीबन हर हिस्से पर असर डाल रही है.

बीबीसी ने अफ़ग़ानिस्तान जाकर देखा कि वहाँ आम लोग जंग की क्या क़ीमत चुका रहे हैं....देखिए लीस ड्यूसेट की रिपोर्ट

तालिबान और अफ़ग़ान सरकार दोनों ने ही मारे गए लोगों के बीबीसी के आंकड़ों की वैधता पर सवाल उठाए हैं. तालिबान ने एक बयान में कहा है कि वो पिछले महीने एक हज़ार लड़ाकों के मारे जाने के निराधार दावों को पूरी तरह ख़ारिज करता है.

तालिबान ने कहा कि ऐसा कोई दस्तावेज़ नहीं है जो इन आंकड़ों को साबित करता हो. तालिबान ने कहा कि बीबीसी की रिपोर्ट अफ़ग़ान प्रशासन के गृह और रक्षा मंत्रालय के दैनिक प्रोपेगैंडा का हिस्सा है.

उधर, अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस रिसर्च की गंभीरतापूर्वक समीक्षा किए जाने की ज़रूरत है और गंभीर रिसर्च के साथ ज़मीनी हक़ीक़तों को रिपोर्ट में शामिल किया जाना चाहिए. हालाँकि बीबीसी अपने पत्रकारिता के सिद्धांतों पर खड़ी है.

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