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कश्मीर अपडेट: जम्मू-कश्मीर में किन तीन मसलों की हो रही चर्चा

  • 21 सितंबर 2019

जम्मू-कश्मीर में शनिवार को तीन मसलों पर चर्चा रही. पहला, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या वहां बच्चों को हिरासत में रखा गया है, तो दूसरा यह कि महबूबा मुफ़्ती की बेटी ने केंद्र पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए सवाल पूछे हैं, वहीं तीसरा यह कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद श्रीनगर पहुंच गए हैं.

बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर तफ़सील से सभी तीन बातों का ज़िक्र कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से इस बाबत रिपोर्ट मांगी है कि क्या जम्मू-कश्मीर में बच्चों को हिरासत में रखा जा रहा है?

5 अगस्त के बाद जम्मू-कश्मीर में नाबालिग बच्चे गिरफ़्तार हुए हैं. कई लोगों ने दावा किया था कि उनके कम उम्र के बच्चे गिरफ़्तार किए गए हैं लेकिन प्रशासन इससे इनकार करता रहा है. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं.

अब जुवेनाइल जस्टिस कमेटी से पूरा ब्योरा मांगा है. अगर कम उम्र बच्चों को गिरफ़्तार किया जाता है तो उसका पूरा ब्योरा केंद्र को देना होता है.

चूंकि कहीं से कोई सूचना नहीं आती है तो सुप्रीम कोर्ट ने याचिका के मद्देनज़र जुवेनाइल जस्टिस कमेटी से रिपोर्ट मांगी है.

बीबीसी ने भी ऐसी कुछ रिपोर्ट्स की थी जिसमें कुछ माता-पिता के हवाले से बताया गया था कि उनके कम उम्र बच्चे भी गिरफ़्तार हैं.

इस पर पुलिस का कहना था कि माता-पिता यह साबित करें कि उनकी उम्र कितनी है? स्कूल के सर्टिफिकेट को नहीं माना गया और नगरपालिका के प्रमाण पत्र मांगे गए.

अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जुवेनाइल जस्टिस कमेटी को रिपोर्ट बनानी होगी. यह रिपोर्ट ही तय करेगी की 5 अगस्त के बाद से कश्मीर में कितने बच्चे गिरफ़्तार हैं.

दूसरी बात यह है कि अगर बच्चों को गिरफ़्तार किया जाता है तो उन्हें जुवेनाइल होम में रखा जाता है जो श्रीनगर के हारवन इलाके में है. लेकिन वहां अभी कोई बच्चा नहीं है. इसका मतलब यह है कि अगर कहीं कोई बच्चा गिरफ़्तार किया भी गया है तो उसे किसी थाने या जेल में रखा गया है.

शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के ट्विटर हैंडल से अचानक ट्वीट आने शुरू हो गए थे जो उनकी बेटी इल्तिजा मुफ़्ती लिख रही थीं.

उन्होंने अपनी मां के ट्विटर हैंडल से यह सूचना दी कि, "जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती, जिनका यह ट्विटर हैंडल है, उन्हें पांच अगस्त, 2019 को नज़रबंद किया गया है. इस हैंडल को महबूबा मुफ़्ती की इजाज़त से अब मैं संचालित करूंगी."

इसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और यहां के गृह सचिव से 5 अगस्त के बाद से अब तक बीते छह हफ़्तों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या, उनमें कितनी महिलाएं और कितने बच्चे हैं, इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

साथ ही इल्तिजा ने कहा है कि उनकी मां (महबूबा मुफ़्ती) बहुत ही कठिन परिस्थिति में वहां जेल में हैं. उनकी मां चश्मा शाही के एक टूरिस्ट हट में हैं लेकिन उसे जेल बना दिया गया है.

इल्तिजा का कहना है कि उन्हें (उनकी मां को) न तो टीवी चैनल देखने की इजाज़त है और न ही अख़बार मुहैया कराए जा रहे हैं.

साथ ही इल्तिजा ने यह भी कहा है कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के मामले पर झूठ बोल रही है और कश्मीर को एक बड़ी जेल में बदल दिया गया है. साथ ही उन्होंने भारतीय मीडिया पर भी आरोप लगाया है कि वो भी झूठ बोल रहे हैं.

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने 5 अगस्त के बाद से कश्मीर में आने की कई कोशिशें कर चुके हैं लेकिन उन्हें एयरपोर्ट से ही लौटा दिया जा रहा था.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप किया. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जम्मू-कश्मीर के चार ज़िलों में जाने की इजाज़त दे दी. वे श्रीनगर पहुंचे गए हैं.

अब वे जम्मू, श्रीनगर, बारमूला और अनंतनाग में जाएंगे.

यहां आने से पहले ही उन्होंने बताया था कि यह उनका राजनीतिक दौरा नहीं है वे किसी राजनीतिक गतिविधि के लिए यहां नहीं आए हैं.

उन्हें उन आम लोगों की चिंता है. वे ऑटो रिक्शा वाले, शिकारा वाले, रेहड़ी पर सामान बेचने वाले उन लोगों के हालात जानना चाहते हैं जो दिन भर कमाई करके शाम को खाते हैं. उनकी बात कोई नहीं कर रहा है न ही प्रशासन ने उनके लिए किसी तरह के नुकसान के भरपाई की घोषणा की है.

लिहाजा ग़ुलाम नबी आज़ाद ने यह कह दिया है कि उनकी मंशा राजनीतिक रैली जैसी कोई चीज़ करने की नहीं बल्कि यह जानने की है कि ऐसे लोग इस कठिन परिस्थिति में कैसे जी रहे हैं.

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