डिप्रेशन की शिकार माँ का ख़याल रखने वाली बेटी की कहानी
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डिमेंशिया की शिकार माँ का ख़याल रखने वाली बेटी की कहानी

  • 14 अक्तूबर 2019

सोचिए...आपके घर के किसी शख़्स की मेमोरी धीरे-धीरे जाने लगे. वह वो सभी बातें भूलने लगे जो आपके और उसके बीच एक रिश्ते की ज़मीन तैयार करती हैं.

कॉरपोरेट क्षेत्र में नौकरी करने के बाद डिप्रेशन का शिकार हुईं अपनी माँ का ख़याल रखते हुए दीपांजना खुद भी डिप्रेशन का शिकार हुईं.

देखिए और सुनिए कि मानसिक समस्याओं से जूझ रहे किसी व्यक्ति का ध्यान कैसे रखना चाहिए. और ऐसा करते हुए अपना ख़याल कैसे रखना चाहिए?

रिपोर्टर - अनंत प्रकाश

वीडियो - देबलिन रॉय

प्रॉड्यूसर - सुशीला सिंह

बीबीसी

(भारत में मानसिक सेहत एक ऐसा विषय है जिस पर खुलकर बात नहीं होती. बीबीसी की कोशिश लोगों को मेंटल हेल्थ के बारे में जागरुक करने की है. इस विशेष श्रृंखला में हम आपको कुछ ऐसे लोगों से मिलवाएंगे जो अकेलेपन और डिप्रेशन या फिर अन्य किसी मानसिक बीमारी का शिकार रहे हैं या जिन्होंने अपने घर में मौजूद मानसिक रोगियों की देखभाल करते हुए डिप्रेशन आदि का सामना किया है)

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