चंद्रगहण या सूर्यग्रहण से आख़िर क्यों डरते हैं लोग?

चंद्रगहण या सूर्यग्रहण से आख़िर क्यों डरते हैं लोग?

दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जिनके लिए ग्रहण किसी ख़तरे का प्रतीक है- जैसे कि दुनिया के ख़ात्मे या भयंकर उथल-पुथल की चेतावनी.

हिंदू मिथकों में इसे अमृतमंथन और राहु-केतु नामक दैत्यों की कहानी से जोड़ा जाता है और इससे जुड़े कई अंधविश्वास प्रचलित हैं.

ग्रहण सदा से इंसान को जितना अचंभित करता रहा है, उतना ही डराता भी रहा है.

असल में, जब तक मनुष्य को ग्रहण की वजहों की सही जानकारी नहीं थी, उसने असमय सूरज को घेरती इस अंधेरी छाया को लेकर कई कल्पनाएं कीं, कई कहानियां गढ़ीं.

7वीं सदी के यूनानी कवि आर्कीलकस ने कहा था कि भरी दोपहर में अंधेरा छा गया और इस अनुभव के बाद अब उन्हें किसी भी बात पर अचरज नहीं होगा.

मज़े की बात यह है कि आज जब हम ग्रहण के वैज्ञानिक कारण जानते हैं तब भी ग्रहण से जुड़ी ये कहानियां, ये विश्वास बरक़रार हैं.

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