सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फ़िल्म 'दिल बेचारा' कैसी है?

सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फ़िल्म 'दिल बेचारा' कैसी है?

मुमकिन है शहरी दर्शकों में से कुछ ने जॉन ग्रीन का उपन्यास 'द फॉल्ट इन अवर स्टार्स' पढ़ा हो और उस पर बनी हॉलीवुड की फिल्म भी देख ली हो. फिर भी उन्हें इस फिल्म में नवीनता मिलेगी. शशांक खेतान और सुप्रतिम सेनगुप्ता ने उन्हें एक नए परिवेश में नए किरदारों के साथ पेश किया है.

मूल उपन्यास और अंग्रेजी फिल्म का हिंदी में भारतीय एडाप्टेशन हिंदी फिल्मों की उन कहानियों/प्रेमकहानियों के परिचित दायरे में आ गया है, जहां आसन्न मृत्यु के बीच प्रमुख किरदारों का हर्ष-विषाद, प्रेम-तनाव, चिंता-आशंका और जीवन जी लेने की आकांक्षा रहती है. वर्तमान को भरपूर जीने का सन्देश रहता है.

मुकेश छाबड़ा निर्देशित 'दिल बेचारा' झारखंड के जमशेदपुर की किजी बासु और इम्मैनुएल राजकुमार जूनियर उर्फ मैनी की प्रेम कहानी है.

स्टोरी: अजय ब्रह्मात्मज, फ़िल्म समीक्षक

आवाज़: मोहम्मद शाहिद

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