रखमाबाई राउत: 'सहमति की उम्र' का क़ानून बनाने में अहम भूमिका

रखमाबाई राउत: 'सहमति की उम्र' का क़ानून बनाने में अहम भूमिका

बीबीसी हिंदी दस ऐसी महिलाओं की कहानी ला रहा है जिन्होंने लोकतंत्र की नींव मज़बूत की. उन्होंने महिला के अधिकारों को अपनी आवाज़ दी. वे समाज सुधारक थीं और कई महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचने वाली वे पहली महिला बनी.

रखमाबाई की मुहिम ने भारत में 'एज ऑफ़ कंसेंट एक्ट 1891' के पारित होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

इस अधिनियम ने ही पहली बार यह तय किया कि कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाने वाले को सज़ा हो सकती है, भले ही वह विवाहित हो. इसके उल्लंघन को बलात्कार की श्रेणी में रखा गया.

वो ब्रिटिश राज में प्रैक्टिस करने वालीं भारत की पहली महिला डॉक्टर भी बनीं.

उन्होंने अपना बाकी का जीवन महिलाओं के स्वास्थ्य के काम में लगा दिया.

बीबीसी हिंदी दस ऐसी महिलाओं की कहानी ला रहा है जिन्होंने लोकतंत्र की नींव मज़बूत की इसकी तीसरी कड़ी में देखिए असम की चंद्रप्रभा सैकियानी की कहानी.

इस शृंखला की पिछली कड़ियां देखें-

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