दुनिया के पहले टीके का प्रचार करने वाली भारतीय रानियां

दुनिया के पहले टीके का प्रचार करने वाली भारतीय रानियां

वर्ष 1805 में जब देवजमनी पहली बार कृष्णराज वाडियार तृतीय से शादी के लिए मैसूर के शाही दरबार में पहुँचीं तब उन दोनों की उम्र 12 साल थी.

कृष्णराज वाडियार तृतीय दक्षिण भारत के एक राज्य से नये-नये शासक बने थे.

देवजमनी को जल्द ही पता चल गया था कि उन्हें एक बड़े और महत्वपूर्ण काम के लिए चुना गया है और ये काम चेचक के टीके का प्रसार और प्रचार करना था.

देखिए इतिहास के पन्ने पलटती यह कहानी.

स्टोरीः अपर्णा अल्लूरी

आवाज़ः नवीन नेगी

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)