किसान आंदोलनः साल बदलने वाली रात, आंदोलनकारी किसानों के साथ

किसान आंदोलनः साल बदलने वाली रात, आंदोलनकारी किसानों के साथ

‘ज़मीन नहीं पर ज़मीर है, हम अपराजेय हैं.’ सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे लोग गर्मजोशी से ये बात कहते हैं. सरकार और किसानों के बीच आज फिर बैठक हो रही है.

पिछली बैठक और आज के बीच साल बदल गया. सिंघु बॉर्डर आंदोलन का एक अहम चेहरा है. वहां महीने भर से मौजूद लोग नए साल में किस उम्मीद के साथ कदम रख रहे हैं?

उन्हें इस भारत से क्या उम्मीद है ? क्या वे थके नहीं? ऊबे नहीं, उकताए नहीं है अबतक?

उनके साथ नए साल की अगुवाई करने मौजूद थीं बीबीसी में भारतीय भाषाओं की संपादक रूपा झा और कैमरा-एडिटिंग का काम संभाला नेहा शर्मा ने.

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