लॉकडाउन के एक साल बाद भी इनके ज़ख़्म हरे हैं

लॉकडाउन के एक साल बाद भी इनके ज़ख़्म हरे हैं

कोरोना महामारी के चलते 24 मार्च 2020 को भारत में संपूर्ण लॉकडाउन कर दिया गया. भागते-दौड़ते हिंदुस्तान पर अचानक जैसे पावर ब्रेक लगा जिसके झटके कुछ दिन बाद दिखने लगे. लॉकडाउन से बेहाल मजदूर शहरों से गांवों की तरफ जाने लगे. कई मजदूर पैदल ही सैकड़ों मील का सफर तय करने लगे.

वो मजदूर आज भी वो दिन भूल नहीं पाए हैं. कई किलोमीटर पैदल चलकर गांव पहुंचकर भी मजदूरों को चैन ना मिल सका. गांव में काम काज ना होने से परेशानी और बढ़ गई. दूसरों के घरों में काम करने वाली मेड का जीवन भी लॉकडाउन में जैसे बदहाल हो गया. लोगों ने उन्हें अपने घरों में आने मना कर दिया.

बंधुआ मुक्ति मोर्चा नामक संगठन ने मंगलवार को लॉकडाउन के एक साल होने पर दिल्ली के जंतर मंतर में एक प्रदर्शन आयोजित किया. उनकी मांग है कि सरकार को मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए.

वीडियो: नवीन नेगी, दीपक जसरोटिया और शुभम कौल

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