BBC Hindi

समाचार > भारत

'मेक इन इंडिया' के आगे खड़ी 5 चुनौतियां

Facebook Twitter
25 सितंबर 2014 15:54 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की शुरुआत की है, साथ ही डबल ‘एफ़डीआई’ पर फोकस करने की बात कही है.

पहला एफ़डीआई विदेशी निवेश का है और दूसरा है ‘फर्स्ट डेवेलप इंडिया’ यानी पहले भारत का विकास. लेकिन नए अवसरों की राह में बनी हुई हैं कई चुनौतियां भी.

आर्थिक और राजनीतिक मामलों के जानकार परंजॉय गुहा ठाकुरता कहते हैं कि ‘देशी-विदेशी निवेशकों को रिझाने के लिए शुरू किए गए इस अभियान के आगे मूलभूत सुविधाओं की कमी’ होगी.

आइए जानते हैं ‘मेक इन इंडिया’ के आगे खड़ी पांच बड़ी चुनौतियों के बारे में.

इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढाँचा)

मेक इन इंडिया के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा भारत में रेल-सड़क यातायात और अपर्याप्त बंदरगाह है. अगर भारत में निर्माण इकाइयां स्थापित की जाती हैं, तो उत्पाद को गंतव्य तक पहुँचाने के लिए ज़रूरी ट्रांसपोर्ट सुविधा का बंदोबस्त करना ज़रूरी होगा.

साथ ही भारत का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा की कमी से जूझ रहा है. निवेशकों के लिए ये भी चिंता का विषय हो सकता है.

राज्य-केंद्र समन्वय

एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमरीका जा रहे हैं, तो वहीं बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम माझी निवेशकों को लुभाने के लिए लंदन जा रहे हैं. सभी राज्य निवेश चाहते हैं. लेकिन निवेश के रास्ते में एक बड़ी समस्या राज्यों और केंद्र की नीतियों की जटिलता है.

परंजॉय मानते हैं कि समन्वय के इस काम में पीएमओ और केंद्र सरकार के अन्य विभाग निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

भ्रष्टाचार

यूपीए सरकार का दूसरा कार्यकाल घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों के साए में बीता. इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचा. पुराने और नए निवेशकों का विश्वास कमाना मोदी सरकार के आगे एक बड़ी चुनौती होगी.

लाल-फीताशाही

भ्रष्टाचार के अलावा भारत के सरकारी दफ्तरों की दूसरी सबसे बड़ी समस्या लाल फीताशाही है. ‘मेक इन इंडिया’ निवेशक जटिल प्रक्रियाओं के जाल में फंसकर अपना समय गंवाना पसंद नहीं करेंगे. लिहाज़ा सरकार को ऐसी आसान व्यवस्थाएं बनानी होंगी और सिंगल विंडो सिस्टम्स पर ज़ोर देना होगा.

टैक्स व्यवस्था

भारत में बीते कई वर्षों से टैक्स व्यवस्था में सुधार की मांग की जा रही है. अब तक टेलिकॉम से लेकर कई अन्य क्षेत्र की कंपनियां टैक्स संबंधी मामलों के सिलसिले में भारतीय अदालतों के चक्कर काट चुकी हैं. ऐसे में आसान और पारदर्शी टैक्स व्यवस्था की ज़रूरत महसूस होती है.

(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें. ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर भी आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बुकमार्क करें

Email del.icio.us Facebook MySpace Twitter