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कॉपटिक ईसाइयों के साथ झड़पें, 23 की मौत

10 अक्तूबर 2011 03:39 IST

मिस्र की राजधानी काहिरा में अल्पसंख्यक कॉपटिक ईसाई समुदाय के लोगों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पों में कम से कम 19 लोग मारे गए हैं और 150 से ज़्यादा घायल हो गए हैं.

टीवी पर दिखाई तस्वीरों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने सैनिकों पर पेट्रोल बम फ़ेंके और सरकारी टेलीवीज़न की इमारत के बाहर सेना के वाहन जल रहे थे.

कॉपटिक ईसाइयों का आरोप है कि शुक्रवार को असवान प्रांत में एक चर्च को नष्ट करने में कट्टरपंथ मुसलमानों का भी हाथ है. उनकी माँग है कि क्षेत्रीय गवर्नर को हटाया जाए.

कॉपटिक ईसाई मिस्र में जनसंख्या का 10 फ़ीसदी हैं. इनकी शिकायत है कि सत्ताधारी सैन्य परिषद ईसाई-विरोधी हमलावरों के प्रति सख़्त रवैया नहीं अपना रही.

एएफ़पी के मुताबिक प्रधानमंत्री ऐसाम शराफ़ ने लोगों से अपील की है कि वो जातीय हिंसा फैलने न दें.

जातीय हिंसा

एजेंसी के अनुसार प्रधानमंत्री ने अपने फ़ेसबुक पेज पर लिखा है, “जो हो रहा है वो मुसलमानों और ईसाइयों के बीच झड़पें नहीं है बल्कि अराजकता और विद्रोह फैलने की कोशिश है.”

झड़पें केंद्रीय मैसपेरो चौराहे पर शुरु हुई थीं पर जल्द ही तहरीर स्कवेयर पर फैल गई. हज़ारों लोग इस हिंसा में शामिल हो गए. ये स्पष्ट नहीं है कि मृतकों में कितने सैनिक हैं और कितने प्रदर्शनकारी.

प्रदर्शनकारी सैन्य परिषद के इस्तीफ़े की माँग कर रहे थे, ख़ासकर इसके प्रमुख फ़ील्ड मार्शल मोहम्मद तंतावी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में राजनीतिक और सुरक्षा के दृष्टि से जो शून्यता का माहौल बन गया है, उसमें जातीय हिंसा बढ़ी है.

संवाददाता के मुताबिक पुलिस और प्रदर्शनकारियों की बीच झड़पों के अलावा अराजक तत्व भी शामिल थे. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों से झड़प से पहले सादा कपड़े पहने लोगों ने उन पर हमला किया.

मई में कॉपटिक गिरिजाघरों पर हुए हमलों में 12 लोग मारे गए थे. जबकि मार्च में मुसलमानों और कॉपटिक ईसाइयों के बीच झड़पों में तहरीर सक्वेयर पर 13 लोग मारे गए थे.

हिंसा का ताज़ा घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब 28 नवंबर को मिस्र में संसदीय चुनाव होने वाले हैं.

कॉपटिक ईसाई मिस्र में सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है. ये लोग भेदभाव की शिकायतें करते रहे हैं जिसमें चर्च बनाने के लिए राष्ट्रपति की अनुमति लेने की बात शामिल है.

मिस्र में सिर्फ़ ईसाई धर्म से इस्लाम में परिवर्तित होने के मान्यता मिली हुई है लेकिन इसका उलटा नहीं हो सकता.

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