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कैंसर, ह्रदयरोग का खतरा बढ़ा: डब्ल्यूएचओ

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16 मई 2012 21:48 IST
डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि दुनिया भर में लोगों को ह्रदय रोग, स्ट्रोक और कैंसर जैसी बीमारियों होने का खतरा पहले से अधिक है.

सभी 194 सदस्य देशों से जुटाए गए आंकड़ों पर बनाई गई सालाना स्वास्थ्य रिपोर्ट में डबल्यूएचओ ने कहा कि लोगों में उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसी समस्याएं बढ़ी हैं.

रिपोर्ट में बताया गया कि ऐसी बिमारियां बढ़ने का मुख्य कारण वसायुक्त खाने का उपभोग और वर्जिश की कमी है.

दुनियाभर की कुल आबादी का 12 फीसदी भाग मोटापे की समस्या के ग्रस्त है.

हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि जागरूकता अभियानों के बाद मातृ मृत्यु दर में गिरावट आई है.

गरीब देशों में भी मधुमेह

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि बदलती जीवनशैली से मधुमेह और ह्रदयरोग जैसी खतरनाक बीमारियां विकसित देशों से लेकर अफ्रिका के गरीब देशों तक फैल चुकी है.

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों में पता चला कि दुनियाभर के हर तीसरे व्यस्क को उच्च रक्तचाप की समस्या है, जो कि ह्रदयाघात का मुख्य कारण माना जाता है. भारत में ये आंकड़ा करीब 23 फीसदी है जबकि अफ्रीका के कई देशों में हर दूसरे व्यक्ति को उच्च रक्तचाप की समस्या है.

जिनेवा स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वार्षिक स्वास्थ्य रिपोर्ट में कहा कि दुनियाभर में हर दस में से एक व्यस्क को मधुमेह है जिसके उपचार में अरबों डॉलर खर्च होते है और दूसरे बीमारियों के भी होने का खतरा बना रहतै है.

भारत में भी मधुमेह से ग्रस्त रोगी या संभावित रोगियों का आंकड़ा करीब 11 फीसदी तक पहुंच गया है.

आम धारणा है कि मधुमेह, ह्रदयरोग और कैंसर जैसी बिमारियां रईस देशों के लोगों को ज्यादा होती है क्योंकि उनका खान-पान वसायुक्त होता है और शराब, सिगरेट का उपभोग जैसे शौक वहां आम होते है.

(सभी आंकड़े साल 2008 के है और प्रतिशत में है)

खतरा बढ़ा

लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इन बीमारियों से होने वाली करीब 80 फीसदी मौतें गरीब और विकासशील देशों में होती है.

रॉयटर्स के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन के निदेशक मारग्रेट चैन ने कहा, “ये रिपोर्ट इस बात को पुख्ता करता है कि ह्रदयरोग जैसी बिमारियों का कारकों में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है, खासकर विकासशील और गरीब देशों में.”

डब्ल्यूएचओ ने इस साल के स्वास्थ्य रिपोर्ट में पहली बार सभी 194 सदस्य देशों से जुटाए गए आंकड़े सम्मिलित किए. पुरुषों और महिलाओं में उच्च रक्तचाप, हाइपर टेंशन और मधुमेह जैसे रोगों के प्रभाव पर भी आंकड़े दिए गए है.

दुनियाभर के लोगों के बीच इन बीमारियों के प्रभाव की एक तस्वीर पेश करती इस रिपोर्ट में खतरों के बढ़ने के कारण रौशनी नहीं डाली.

डब्ल्यूएचओ ने इन बीमारियों से इतर देखे जाने वाली मोटापे की समस्या पर भी चिंता जताई है. आंकड़ो के अनुसार साल 1980 से 2008 के बीच दुनिया के हर कोने में मोटापे की समस्या दोगुनी हुई है.

मोटापे की सबसे ज्यादा समस्या अमरीका में है जहां, 26 फीसदी व्यस्क मोटे है. दक्षिण-पूर्व एशिया में मोटापे से ग्रस्त लोगों के आंकड़े सबसे कम है.

रिपोर्ट का दावा है कि दुनियाभर में महिलाओं के मोटापाग्रस्त होने की संभावना पुरुषों के मुकाबले ज्यादा होती है. लिहाज़ा महिलाओं का दूसरी बीमारियों से भी ग्रस्त होने की समभावना बढ़ जाती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताज़ा वार्षिक रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करे.

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