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जब भारत बर्बर युग में पहुंच गया

  • 31 अक्तूबर 2009

1984 के सिख विरोधी दंगे भारत पर एक ऐसे बदनुमा दाग की तरह हैं जिन्हें मिटाना बेहद मुश्किल ही नहीं शायद नामुमकिन है. बहुतों का कहना है कि उन घावों का भरना इसलिए और मुश्किल है क्योंकि वो अपनों ने दिए थे.

पच्चीस साल के बाद क्या है स्थिति. सुनिए रेहान फ़ज़ल से.