सुब्ह-ए-बनारस के नज़ारे

सुबह-ए-बनारस

  • सुबह-ए-बनारस
    बनारस की सुबह सूर्य निकलने से पहले हो जाती है. लोग घाट की ओर जाने लगते हैं और तरह-तरह की दुकानें सज जाती हैं.
  • सुबह-ए-बनारस
    जब लोग हों, दुकानें सज रही हों तो भिक्षा माँगने वाले क्यों सोते रहें भला. वे भी घाट पर कतार से बैठ जाते हैं.
  • सुबह-ए-बनारस
    लोग पूजा पाठ में लग जाते हैं. गंगा की पूजा और सूर्योदय पर सूर्य की पूजा.
  • सुबह-ए-बनारस
    देश-दुनिया के लोग सुबह पाँच बजे से ही घाट पर आने लगते हैं. वहाँ नाव वालों के बीच होड़ होती है कि उसे ज़्यादा सवारियाँ मिल जाएँ.
  • सुबह-ए-बनारस
    नदी के पार आसमान पर लालिमा दिखाई देने लगती है और उजाला फैलता सा दिखता है. नावें नदी में इधर उधर दिख रही हैं.
  • सुबह-ए-बनारस
    सूरज निकला और एकाएक नदी में सूरज की सुनहरी परछाईं दिखाई देने लगती है.
  • सुबह-ए-बनारस
    गंगा के प्रदूषित होने पर चिंता चल रही है लेकिन पवित्रता पर अभी भी संदेह नहीं है. लोग सुबह-सुबह स्नान करने पहुँच जाते हैं.
  • सुबह-ए-बनारस
    तीर्थ यात्री और पर्यटक दोनों चाहते हैं कि एक बार नाव पर सवार होकर घाटों को देख लें.
  • सुबह-ए-बनारस
    ये है दशाश्वमेध घाट. वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों में से एक.

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