आइसलैंड में ज्वालामुखी फटा

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उत्तर अटलांटिक महासागर में स्थित द्वीप आइसलैंड में दो सौ साल से सोया हुआ एक ज्वालामुखी फट पड़ा है.

ये ज्वालामुखी अंतिम बार 1821 में फटा था. उसके बाद पिछले महीने 20 मार्च को इससे फिर लावा निकलने लगा.

ये ज्वालामुखी कोई 22 दिन तक सुलगने के बाद ठंडा पड़ गया.

मगर दो दिन बाद 14 अप्रैल को इसके पास ही एक और जगह पर ज्वालामुखी फटना शुरू हुआ.

ज्वालामुखी के मुख से काला धुआँ और उजली भाप निकल रही है साथ ही राख़ भी उड़ रही है.

लेकिन पिछले बार से अलग इस बार ज्वालामुखी एक ग्लेशियर के नीचे फटा है.

बर्फ़ में ढंके क्रेटर के दो सौ मीटर नीचे से धुआँ निकल रहा है.

इससे ग्लेशियर पिघलने लगा और नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई.

फ़िलहाल बाढ़ की स्थिति नियंत्रित है मगर ज्वालामुखी से राख और भाप निकलना जारी है.

राख तेज़ हवा के कारण आसमान में दूर-दूर तक उड़ रही है. इसका हवाई सेवा पर गंभीर असर पड़ा है.

ना केवल आइसलैंड बल्कि पूरे पश्चिमोत्तर यूरोप में हवाई यातायात ठप्प हो गया है.

ब्रिटेन, आयरलैंड, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ़िनलैंड, फ़्रांस, बेल्जियम - में हवाई उड़ानें बंद कर दी गई हैं.

विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि ज्वालामुखी से निकल रही राख के साथ मिले हुए कंकड़, शीशे और बालू के कणों से हवाई जहाज़ों के इंजिन जाम हो सकते हैं.

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