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बच्चों पर कितनी सख़्ती जायज़ है?

  • 18 जून 2010

ला मार्टीनेयर स्कूल के बारह वर्षीय छात्र रोवन रावला ने आत्महत्या कर ली. आरोप है कि स्कूल में हुई पिटाई और कक्षा से बाहर निकाले जाने से दुखी होकर उसने यह क़दम उठाया.लेकिन रोवन रावला का मामला कोई अकेला क़िस्सा नहीं है.स्कूल में बच्चों पर की जाने वाली सख़्ती पर राय भिन्न-भिन्न है.कुछ लोग सख़्ती के बहुत ख़िलाफ़ हैं. वो मानते हैं कि बच्चा फूल की तरह होता है उसे सहेज कर रखा जाना चाहिए. जबकि कुछ लोग मानते हैं कि बच्चा कच्ची मिट्टी की तरह होता है इसे ताप देकर पकाना भी पड़ता है.तो बच्चों से स्कूलों में कैसा बर्ताव होना चाहिए? बीबीसी इंडिया बोल में इस बार बहस का विषय यही है.