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ख़त्म होनी चाहिए मौत की सज़ा?

क्या मौत की सज़ा अपराध को रोकने मे कारगर है या आज के दौर में इसे सभ्य न्यायिक प्रक्रिया के चेहरे पर बर्बर और अमानवीय निशान माना जाए?हाल ही में अमरीका के यूटा राज्य में पच्चीस साल से मौत की सज़ा का इंतज़ार कर रहे एक अपराधी को गोली मार दी गई जिस पर आम लोगो की तीखी प्रतिक्रिया आई है.भारत में पिछले कुछ महीनों में कई मामलों मे मौत की सज़ा सुनाई गई जिसमें मुंबई हमलों के लिए दोषी अजमल कसाब प्रमुख हैं.क्या ऐसी कड़ी सज़ा से लोग अगली बार अपराध को दोहराने मे डरेंगे.. क्या मौत की सज़ा के प्रावधान से अपराध कम होने की संभावना है या कि अपराध के प्रति एक सुधारवादी रवैया इससे निपटने में ज़्यादा कारगर साबित होगा.आज दुनिया के 58 देशो में इस सज़ा का प्रवाधान है जिसमें भारत भी शामिल है लेकिन 95 देशो ने इसे अपने कानून से हटा दिया है.