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फ़र्ज़ी मुठभेड़ों पर नर्म रवैया?

हाल ही में माओवादी नेता चेरुकुरु राजकुमार उर्फ़ आज़ाद और 'स्वतंत्र पत्रकार' हेमचन्द्र पाण्डे की आदिलाबाद के जंगलों में हुई मौत के बाद फ़र्ज़ी मुठभेड़ों के बारे में सवाल फिर पूछा जाने लगा है.मानवाधिकार संगठनों ने इसे फ़र्ज़ी मुठभेड़ बताया है. इससे पहले ख़ालिस्तान चरमपंथ के दौर में या फिर कश्मीर में या उत्तरपूर्व में भी फ़र्ज़ी मुठभेड़ों के आरोप लगते रहे हैं जिन्हें पुलिस और सरकार ग़लत बताते रहे हैं.