प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

बहस पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में

छत्तीसगढ़ का पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय अविभाजित मध्यप्रदेश के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है. स्थानीय लोग इसे राज्य के गौरव की तौर पर देखते हैं.

लेकिन जब बीबीसी संवाददाता सलमान रावि, सुशील झा और तकनीकी संचालक गरिमा सर्राफ़ की टीम वहां पहुंची और उच्च शिक्षा पर बहस की शुरूआत हुई तो छात्र, छात्राओं और शिक्षकों ने बेबाक राय पेश की. देश के नीति निर्धारकों के लिए ये बहस काफ़ी मददगार साबित हो सकती है.

एक छात्रा का कहना था, “यूनिवर्सिटी में शिक्षा की जगह डिग्री बेचने का काम होता है. शोध करने के लिए न तो उपकरण हैं न ही मार्गदर्शक. बताईए हम कैसे आगे बढ़ें.”

एक शिक्षक का जवाब था कि हालात ऐसे हैं कि “कश्ती के मुसाफ़िर ने समंदर नहीं देखा”.

उनका कहना था कि जानकारी की ऐसी कमी है कि शिक्षकों की ज़िम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है और इसके लिए एक वातावरण तैयार करना अहम है.

कई छात्रों का इस बात का मलाल था कि उनके विश्वविद्यालय का नाम राष्ट्रीय स्तर पर कहीं नहीं है.

नक्सल प्रभावति अबूझमार से आए एक छात्र ने वर्तमान स्थिति पर सटीक टिप्पणी दी.

उनका कहना था, “अबूझमार में काम मे लगे एक बच्चे से पूछा गया कि अब तो सरकार ने शिक्षा के अधिकार को पारित कर दिया है तो फिर वो पढ़ाई क्यों नहीं कर रहा. जवाब था---अभी तो ट्रेन दिल्ली से निकली है, अबूझमार आते-आते तो सौ साल लगेंगे.”

सुनिए इस गरमागरम और रोचक बहस को.