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क्या नियामगिरी पहाड़ बच पाएगा?

  • 27 अगस्त 2010

केंद्र सरकार ने ब्रितानी कंपनी वेदांता को उड़ीसा के नियामगिरी पहाड़ों में बॉक्साइट खोदने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है.इस इलाक़े में रहने वाले डोंगरिया कोंध आदिवासी अपनी ज़मीन और जंगल को वेदांता के हाथों में जाने से रोकने के लिए बरसों से आंदोलन कर रहे थे. और फ़िलहाल ये दौर उन्होंने जीत लिया है.पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर वेदांता का प्रोजेक्ट आगे बढ़ा तो नियामगिरी पहाड़ियों के बड़े हिस्से में जंगल नष्ट हो जाएंगे और वहाँ रहने वाले डोंगरिया कोंध आदिवासियों का अस्तित्व ख़तरे में पड़ जाएगा.पर सवाल है कि क्या नियामगिरी वाक़ई बच पाएगा? क्या इससे विकास को लेकर कोई सार्थक बहस छिड़ पाएगी? देश के दूसरे हिस्सों में संसाधनों पर मालिकाना हक की लड़ाई कौन जीतेगा – उद्योगपति या आदिवासी?