'प्रकृति बहुत मुश्किल में है'

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जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र का एक पखवाड़े तक चलने वाला सम्मेलन जापान में शुरू हुआ है जिसमें पशुओं और पेड़ों की अनेक प्रजातियों के लुप्त होने के बारे में गंभीर चेतावनियाँ दी गई हैं.

दुनिया भर में रहने वाले लगभग साढ़े छह अरब लोग लगातार धरती की धरोहर का उपभोग कर रहे हैं और इसकी क़ीमत प्रकृति को चुकानी पड़ रही है.

1992 में हुए रियो पृथ्वी सम्मेलन में इन संसाधनों की संरक्षा के लिए निर्धारित किए गए लक्ष्यों को हासिल करने में क्या, कहाँ और क्यों कमी रही, इस पर भी इस सम्मेलन में विचार किया जा रहा है.

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