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विशिष्ट पहचान संख्या मदद या जासूसी ?

हाल ही में महाराष्ट्र के कुछ आदिवासियों को 12 अंकों वाले विशिष्ट पहचान पत्र देकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के हर नागरिक को एक ख़ास पहचान दिए जाने के अभियान की शुरुआत की.

सरकार का दावा है कि ये विशिष्ट पहचान पत्र देश के हर नागरिक को दी जाएगी और इससे ज़रूरतमंदों तक सरकार की मदद पहुंचेगी. उन्हें हर तरह की सरकारी सुविधा हासिल होगी. इसमें देश के हर नागरिक की उंगलियों के निशान और आंख की पुतलियों की तस्वीर ली जाएगी.

बायोमेट्रिक तरीके से इकट्ठा की गई ये जानकारियां और क़ीमती आंकड़े 24 घंटे सरकारी एजेंसियों के लिए उपलब्ध रहेंगे.

देश में इसे लेकर विरोध के स्वर भी उभरने लगे हैं. कई नागरिक संगठनों का कहना है कि इससे नागरिक अधिकारों का हनन होता है. इस तरह की जानकारी पहले अपराधियों की बाबत इकट्ठा की जाती थी. सगंठनों को एतराज़ है कि उंगलियों के निशान इकट्ठा करने जैसे तरीक़े अब नागरिकों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

इस बार बीबीसी इंडिया बोल में बहस का यही मुद्दा था.