प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

अदालतों पर कौन नज़र रखेगा?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि वहाँ बहुत कुछ सड़ चुका है. कई जजों के रिश्तेदार उसी कोर्ट में प्रेक्टिस करते हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में ही अपील की थी.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्पणी को रद्द करने से इनकार कर दिया है. देश की सर्वोच्च अदालत की इतनी खुली टिप्पणी के बाद न्यायपालिका में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए क्या किया जा सकता है?