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तिब्बत की तुलना कश्मीर से की जा सकती है

चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबायो के हाल की भारत यात्रा के बाद ऐसा पहली बार हुआ कि भारत ने साझा बयान में तिब्बत को चीन का अभिन्न अंग नहीं कहा और अखंड चीन की बात भी नहीं कही.क्या अब समय आ गया है कि भारत तिब्बत के सवाल को तुरुप के पत्ते की तरह इस्तेमाल कर सकता है ताकि कश्मीर पर चीन को तटस्थ रखा जा सके?

क्या भारत को अब आज़ाद तिब्बत के समर्थन में खुल कर सामने आना चाहिए...

अभी तक भारत ने तिब्बत मसले पर चीन को खुल कर चुनौती नहीं दी है सिवाय लगभग पचास साल पहले तिब्बतियों के धर्म गुरू दलाई लामा को भारत में शरण देने के जो बात चीन को कभी रास नहीं आई.

लेकिन आप क्या सोचते है ?