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माओवादियों के गढ़ में - भाग तीन

  • 27 जनवरी 2011

माओवादी प्रभाव वाले ज़्यादातर गाँवों में न सड़क है न पानी, न बिजली, न स्कूल और न ही अस्पताल. कचनार जैसे गाँव में रात के अँधेरे में माओवादी छापामारों से मिलने के लिए लगभग पूरा गाँव आ जुटता है. इस गाँव के नौजवान कहते हैं कि सरकार और देश ने उन्हें कभी नहीं पूछा. इसीलिए वो कहते हैं कि अगर पुलिस वाले डुमरिया थाने से निकलेंगे ही तो उन्हें उड़ा दिया जाएगा.