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माओवादियों के गढ़ में - भाग पांच

  • 27 जनवरी 2011

ढकपहरी गाँव औरंगाबाद का ऐसा गाँव है जिसे कचनार की तरह ही पुलिस और सरकारी विभाग में नक्सियों का गाँव माना जाता है. गाँव वाले बताते हैं कि तीस साल पहले पहली बार यहाँ जब माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर के लोग यहाँ आए थे तो उन्हें मुँडकटवा कहा जाता था. उन्होंने गाँव के दलित समाज के लोगों को ज़मींदारों के ख़िलाफ़ हथियारबंद लड़ाई के लिए संगठित किया.