जहां लाल सलाम नारा है

  • माओवादी
    ये दंडकारण्य है. छत्तीसगढ़ के इस इलाक़े को माओवादी एक 'मुक्त क्षेत्र' कहते हैं. (सभी तस्वीरें - सुवोजीत बागची)
  • गोंड जनजाति की एक महिला
    इस क्षेत्र के असली बाशिंदे गोंड जनजाति के लोग हैं. मध्य भारत में इनकी संख्या 40 लाख के क़रीब है. गोंड आदिवासी बड़ी संख्या में माओवादियों के समर्थक हैं.
  • माओवादी
    ये जंगल वर्ष 2004 में कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) के परचम तले आए माओवादियों के नियंत्रण में हैं. अपनी 'सुरक्षा सुनिश्चित' करने के लिए ये लोग हर दिन 15 किलोमीटर चलते हैं.
  • माओवादी
    माओवादी ऐसे ही प्लास्टिक के टेंटों में डेरा जमाते हैं. वे इन टेंटों को मिनटों समेट कर आगे बढ़ जाते हैं.
  • माओवादियों की हैंडबुक
    ये माओवादियों की 'क्षेत्रिय समिति हैंडबुक' है. इस विस्तृत दस्तावेज़ में दिशा-निर्देश हैं, जैसे कितना साबुन या तेल इस्तेमाल करना है. इसमें शादी के बारे में भी निर्देश हैं.
  • माओवादियों की हैंडबुक
    ये 'कम्यूनिस्ट ट्रेनिंग स्कूल' का पाठ्यक्रम है. माओवादी प्रवक्ता गुडसा उसेंडी के अनुसार ये कोर्स छह महीने चलता है, बशर्ते इसपर कोई हमला ना हो जाए.
  • ईलाज करते माओवादी
    जहां-जहां माओवादी रुकते हैं, स्थानीय लोग अपना ईलाज करवाने के लिए आ जाते हैं. इस तस्वीर में माओवादी अपने कैंप में एक बीमार का ईलाज कर रहे हैं.
  • माओवादियों का प्रशिक्षण
    माओवादियों के पास कई किस्म के हथियार हैं. उनके पास एके-47 और इनसास जैसे स्वचालित हथियार भी हैं.
  • माओवादी
    माओवादी और गांववाले जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए फंदा डालते हैं. माओवादी ऐसे ही फंदे सुरक्षाबलों को फंसाने के लिए भी डालते हैं.
  • पीड़ित
    इन सभी महिलाओं ने तीन फ़रबरी 2010 को अपने पतियों को खो दिया. इनके पतियों के कथित तौर पर सुरक्षाबलों ने मारा है.
  • माओवादियों की सार्वजनिक बैठक
    ये माओवादियों की सार्वजनिक बैठक है. इस बैठक में एक हज़ार ग्रामीण जमा हुए. माओवादियों के 'चैतन्य नाट्य मंच' ने भी अपना कार्यक्रम पेश किया.
  • माओवादी महिलाएं
    माओवादी विद्रोह में महिलाएं बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं. जिस कैंप में मैं गया वहां आधे से अधिक महिलाएं थीं.
  • माओवादी
    रेडियो पर समाचार सुनने के अलावा लैपटॉप पर फ़िल्म देखना मंनोरंजन का एकमात्र साधन है. यहां पचास के दशक में बनी 'दो बीघा ज़मीन' को बार-बार देखा जाता है.
  • कोया कमांडो
    दिलीप सेठिया 'कोया कमांडो' नाम के दस्ते के सदस्य हैं. पहले माओवादी रह चुके सेठिया कहते हैं कि उन्होंने 'कई माओवादियों को मारा' है.
  • विश्व रंजन
    छत्तीसगढ़ के पुलिस प्रमुख विश्व रंजन मानते हैं कि हिंसा माओवादी करते हैं ना कि पुलिस.

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