ओबामा का इंटरव्यू-- पहला हिस्सा

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अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा प्रमुख मुद्दों पर अपनी राय कुछ इस तरह व्यक्त की.

ओसामा का पाकिस्तान में मारा जाना

"वहाँ पाँच छह साल तक रहने के लिए उस परिसर के बाहर से मदद की ज़रूरत रही होगी, वह मदद सरकारी थी, ग़ैर सरकारी थी, एक बड़ा नेटवर्क था, या चंद लोग थे, ये वो बातें हैं जिनकी हम जाँच कर रहे हैं, हम पाकिस्तानियों से भी जाँच करने को कह रहे हैं. ज़ाहिर है, पाकिस्तानी इस घटना से परेशान हैं, बिन लादेन वहाँ रहा और किसी को पता नहीं चला या फिर कुछ लोगों को पता था, दोनों बातें परेशान करने वाली हैं, यह पाकिस्तान के ऊपर है कि वह विस्तार से जाँच करे, इस मामले को पूरी गंभीरता से ले, इस मामले पर हम उनके साथ गहन विचार विमर्श कर रहे हैं".

दोबारा ऐसी कार्रवाई की संभावाना

"हमारा काम अमरीका की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, हम पाकिस्तान की संप्रभुता का सम्मान करते हैं, लेकिन हम ऐसी गतिविधियों की अनुमति नहीं दे सकते कि कोई हमारी जनता या हमारे सहयोगी देशों की जनता को मारने की साज़िश रच रहा हो, हम कोई कार्रवाई न करके इस तरह की साज़िशों को अंजाम तक नहीं पहुँचने दे सकते".

अफ़ग़ानिस्तान और तालिबान

"हमने सैनिक प्रयासों से जो कुछ हासिल किया है उसके माध्यम से हमें एक राजनीति समझौते तक पहुँचना होगा, ऐसा समझौता जो ये सुनिश्चित करे कि अफ़ग़ान संविधान का पालन होगा, चुनाव निष्पक्ष होंगे, मानवाधिकारों और महिलाओं के अधिकारों का सम्मान होगा. हर तरह के उपयुक्त परिणाम नहीं निकलने वाला है लेकिन हम उस स्थिति तक पहुँच जाएँगे जहाँ से राजनीतिक मेलमिलाप की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी, इसके लिए तालिबान से बातचीत करनी होगी, हमारी शर्तें बिल्कुल स्पष्ट हैं, तालिबान को अल क़ायदा से संबंध ख़त्म करने होंगे, हिंसा का रास्ता छोड़ना होगा और अफ़ग़ान संविधान का सम्मान करना होगा".

भारत-पाकिस्तान

"पाकिस्तान के लिए भारत हौव्वा है, वे भारत को अपने अस्तित्व के लिए ख़तरे के तौर पर देखते हैं, मेरे हिसाब से यह ग़लती है, मेरा ख़याल है कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांति होने पर पाकिस्तान को काफ़ी लाभ होगा. वह अपने संसाधनों को वाणिज्य-व्यापार में लगा पाएगा और उसी तरह बड़े स्तर पर प्रगति कर सकेगा जैसा कि आप देख रहे हैं भारत कर रहा है. वे अफ़ग़ानिस्तान या कबायली इलाक़े की स्थिति को इसी चश्मे से देखते हैं, वे हमेशा सोचते हैं कि भारत के साथ होड़ में किसी बात का क्या परिणाम होगा. हम उनसे बात कर रहे हैं कि वे किस तरह अपनी रणनीति बदलें और समझें कि पाकिस्तान की स्थिरता को सबसे बड़ा ख़तरा अपने भीतर से है. जो लोग पुलिस स्टेशनों, भीड़ भरे बाज़ारों और पाकिस्तान के निर्वाचित प्रतिनिधियों को निशाना बना रहे हैं अगर उन पर काबू नहीं किया गया तो पाकिस्तान बहुत ही बुरी तरह अस्थिर हो जाएगा".

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