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कलम नहीं तो क्लच सही

  • 26 मई 2011

कभी समाज और परिवार में हाशिए पर रहने वाली दिल्ली की बस्तियों की कई लड़कियाँ अब नए जीवन की ओर बढ़ रही हैं. पढ़ाई-लिखाई पूरी करने का तो इन्हें ठीक से मौका नहीं मिला लेकिन उन्हें गाड़ी चलाने की ट्रेनिंग देकर बतौर ड्राइवर सड़कों पर उतारा जा रहा है. (पैसे तो ये लड़कियाँ कमा ही रही हैं, अपनी हिम्मत से मिसाल भी पेश कर रही हैं). बीबीसी संवाददाता की विशेष रिपोर्ट.