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कोलकाता का 'हैंडी-कैम गैंग'

दुनियाभर के हज़ारों-करोड़ों बच्चों का बचपन कारखानों के धुएं और बर्तनों की जूठन के बीच घिर कर रह गया है. इन बच्चों की कहानियां अक्सर हम तक पहुंचती हैं, लेकिन इस बार कहानी के पात्र ही कहानी के सूत्रधार हैं.

अपने बदहाल बचपन की दास्तान बयां करने के लिए ये बच्चे खुद बन गए हैं फिल्मकार.

सिटीज़न रिपोर्ट की कड़ी में पेश है कोलकाता के स्वपन मुखर्जी की कहानी जिन्होंने हाशिए पर जी रहे इन बच्चों को कैमरे का ताकत दी और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ दिया.