मुआवज़ा ख़त्म हुआ, अब क्या?

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ये उन लोगों की कहानी है जिनकी ज़मीन उत्तर प्रदेश सरकार ने कई साल पहले अधिग्रहीत कर ली थी. किसानों को बताया गया था कि उनकी ज़मीन पर एक हाईवे और कई कल कारख़ाने लगेंगे और लोगों को रोज़गार मिलेगा. यही सोचकर घरबरा गाँव के किसानों ने मुआवज़े की रक़म स्वीकार कर ली.

आज अपनी ज़मीनें खोने के आठ साल बाद यहाँ के किसान कहते हैं कि मुआवज़े की रक़म अलग अलग मदों में ख़र्च हो चुकी है, ज़मीन बची नहीं और रोज़गार सरकार ने मुहैया करवाया नहीं.

बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी ने पिछले दिनों ग्रेटर नोएडा से आगरा तक यमुना एक्सप्रेस वे के किनारे बसे गाँवों में जाकर वहाँ के किसानों की हालत का जायज़ा लिया.

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