इराक़ से अमरीकी सेना की वापसी

 गुरुवार, 15 दिसंबर, 2011 को 17:52 IST तक के समाचार

इराक़ में अमरीका ( 2003 से 2011 )

  • एक इराक़ी बाज़ार में अमरीकी सैनिक

    इराक़ में अमरीका ( 2003 से 2011 )

    अमरीका ने ये साबित करने के लिए कि इराक़ में भारी मात्रा में विनाश करने के हथियार हैं, उसपर हमला किया. अमरीकी सेना 2003 से इराक़ में है. अब जबकि बराक ओबामा ने अमरीकी सेना की वापसी का ऐलान किया है, बीबीसी आठ साल तक चले इस अभियान एक नज़र डाल रहा है.

  • 20 मार्च 2003, अमरीकी मिसाइलों ने बग़दाद को निशाना बनाया.

    आक्रमण शुरू ( 19-20 मार्च 2003 )

    अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने एक बयान में कहा कि अमरीका ने इराक़ के कुछ चुनींदा ठिकानों पर हमला कर दिया है. इराक़ी फ़्रीडम नाम का ऑपरेशन शुरू हो गया था. शुरू में बग़दाद के बाहर खेतों पर मोर्चेबंदी तबाह करने के लिए हमले किए गए. गोपनीय सूचना थी कि सद्दाम हुसैन वहीं छिपा है. बग़दाद पर दो दिन तक बमबारी होती रही.

  • सैनिक अमरीकी झंडे से एक मूर्ति को ढकता हुआ

    बग़दाद की हार (3-12 अप्रैल 2003)

    एक महीने से भी कम समय में अमरीकी टैंक इराक़ी राजधानी की सड़कों पर थे. राष्ट्रपति बुश के प्रवक्ता ऐरी फ़्लेशर ने कहा था, "राष्ट्रपति को ये अहसास है कि सैन्य अभियान अच्छी प्रगति कर रहा है, लेकिन उन्हें ये भी अंदेशा है कि भविष्य में और बड़े ख़तरे मौजूद हैं."

  • मई 2003 में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने घोषणा की कि अमरीका इराक़ युद्ध में जीत गया है.

    'अभियान पूरा' (एक मई 2003)

    आक्रमण के दो महीने बाद राष्ट्रपति बुश केलिफ़ोर्निया के सेन डिएगो में एक एयरक्राफ़्ट कैरियर पर दिखे. बुश प्रशासन ने ये साफ़ किया कि राष्ट्रपति यूद्ध के आधिकारिक अंत का ऐलान नहीं कर रहे हैं. ऐसा इसलिए कहा जा रहा था क्योंकि राष्ट्रपति बुश ने कभी भी इराक़ पर किसी आधिकारिक युद्ध की घोषणा नहीं की थी. और साथ ही छिटपुट लड़ाई अब भी जारी थी. अमरीकी सेना इराक़ में आठ साल और रहने वाली थी.

  • सद्दाम हुसैन का पोस्टर

    सद्दाम हुसैन पकड़े गए ( 13 दिसंबर 2003 )

    अमरीकी प्रशासन पॉल ब्रेमर ने कहा, "हमने उसे पकड़ लिया है." सद्दाम को उनके गृह शहर तिकरित के दक्षिण में एक आठ फुट गहरे तहख़ाना में पाया गया था. इस तहख़ाने की मुहाना एक कालीन से ढका हुआ था. साल 2006 में इराक़ी सरकार द्वारा चलाए एक मुकदमें के बाद सद्दाम को अपने कार्यकाल के दौरान किए गए अपराध का दोषी पाया गया और फांसी पर लटका दिया गया.

  •  फ़ालुजाह में अमरीकी सेना और विद्रोहियों के बीच जंग में फंसे आम लोग

    विद्रोह शुरू ( जून 2003-2004 )

    विद्रोहियों ने अमरीका के नेतृत्व वाली सेनाओं पर हमले शुरू कर दिए. अप्रैल 2004 में विद्रोहियों और अमरीकी सेना के बीच फ़ालुजाह में भीषण लड़ाई हुई. लेकिन फ़ालुजाह में दूसरी लड़ाई में इस युद्ध के दौरान सबसे अधिक ख़ून बहा. इस लड़ाई में 120 विद्रोही और 800 नागरिक मारे गए. गठबंधन सेना के 100 सैनिक मारे गए और कम से कम 600 लोग घायल हुए.

  • अमरीका सैनिक क़ैदियों का यातनाएं देते हुए

    अबु ग़रैब कांड ( अप्रैल 2004 )

    अमरीका के एक टीवी कार्यक्रम '60 मिनट' में अबु ग़रैब जेल की कुछ तस्वीरें दिखाई गईं जिनमें अमरीकी सैनिक क़ैदियों को अपमानजनक यातनाएं दे रहे थे. अमरीकी अधिकारियों ने कहा कि ये मुट्ठी भर सैनिकों का कारनामा है. लेकिन साल 2008 में अमरीकी सीनेट की एक कमेटी इस निष्कर्ष पर पहुंची की ये एक व्याप्त आक्रमक संस्कृति का हिस्सा था.

  • आत्मघाती हमला

    आत्मघाती हमले बढ़े (2005)

    साल 2005 में आत्मघाती अपने चरम पर थे. उस वर्ष 478 फ़िदायीन हमले हुए. विद्रोह अब सिर्फ़ अमरीकी सेना के विरुद्ध ना होकर सांप्रदायिक द्वेष बन गया. आमतौर पर सुन्नी शियाओं पर आत्मघाती हमले करते थे.

  • इराक़ की नई सरकार में शिया, कुर्द और सुन्नी दलों की भागेदारी

    नई सरकार ( मई 2006 )

    प्रधानमंत्री नूरी अल-मालिकी ने सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाए जाने के बाद पहली बार एक नई सरकार बनाने के लिए सहमति मांगी. लेकिन आज तक विदेश और गृह विभाग के लिए किसी को मंत्री नहीं बनाया गया. ये दोनों महकमें प्रधानमंत्री के पास ही हैं. जुलाई में मुथाना नाम के प्रांत का प्रशासन पूरी तरह से स्थानीय इराक़ी प्रशासन को दे दिया गया.

  • अमरीकी राष्ट्रपति ने इराक़ में 20 हज़ार अतिरिक्त सैनिक भेजने की घोषणा की

    हमला तेज़ (जनवरी 2007)

    विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बीच अमरीका ने और सेनाएं भेजीं. जनरल डेविड पेट्रियस के नेतृत्व में युद्ध को नई दिशा दी गई, जिसमें लोगों के दिलो-दिमाग़ को जीतने पर ज़ोर दिया गया. साल 2008 तक इराक़ के कुछ इलाक़ों में हिंसा 80 फ़ीसदी तक कम हो गई थी. ठीक इसी समय सुरक्षा की ज़िम्मेदारी इराक़ी सेना को दिए जाने पर ध्यान देना शुरू किया गया.

  •  इराक़ से ब्रितानी सेना की वापसी

    ब्रिटेन के सैनिक लौटे ( 30 अप्रैल 2009 )

    ब्रितानी सेना ने बसरा शहर पर से अपना ध्वज हटाते हुए वापसी का संकेत दिया. साल 2011 में 81 अंतिम ब्रितानी सैनिकों ने उम्म क़स्र बंदरगाह का कार्यभार इराक़ी नौसेना को सौंपा. इराक़ युद्ध में कुल 179 ब्रितानी सैनिक मारे गए.

  • एक बख़्तरबंद सैनिक वाहन के पास सैनिक

    अमरीकी सेना की वापसी ( 31 अगस्त 2010 )

    अंतिम अमरीकी सैनिकों ने इराक़ छोड़ा लेकिन अब भी 50 हज़ार अमरीकी अधिकारी सलाहकार की तौर पर इराक़ में मौजूद हैं. इनका काम इराक़ी सेना को प्रशिक्षण देना है. युद्ध के दौर की समाप्ति का संकेत देने के लिए अब ऑपरेशन 'इराक़ी फ़्रीडम' के बजाय इसे ऑपरेशन 'न्यू डॉन' यानि नई सुबह कहा जा रहा है.

  • अमरीकी राष्ट्रपति ने सेना की वापसी का ऐलान किया

    अंत क़रीब है ( अक्तूबर 2011 )

    राष्ट्रपति ओबामा ने इराक़ में अमरीकी सेना की मौजूदगी ख़त्म करने का ऐलान किया. उन्होंने कहा क्रिसमस तक सैनिक अमरीका में होंगे. ये घोषणा अमरीका और इराक़ के बीच इराक़ में अमरीकी सैनिकों को 'आपराधिक प्रतिरक्षा' पर किसी निर्णय पर ना पहुंच पाने के बाद आई. इसके बाद ये तय हो गया था कि अमरीकी सैनिक हर हाल में 31 दिसंबर 2011 तक इराक़ छोड़ देंगे क्योंकि उस दिन दोनों देशों के बीच सैन्य समझौता ख़त्म हो जाएगा.

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