विधानसभा चुनाव के प्रमुख चेहरे

 गुरुवार, 26 जनवरी, 2012 को 16:22 IST तक के समाचार
  • राहुल गांधी

    कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के लिए सबसे बड़ी चुनौती उत्तरप्रदेश का चुनाव है. पिछले कुछ वर्षों से राहुल गांधी यूपी में बहुत मेहनत कर रहें हैं लेकिन इस बार के विधान सभा चुनाव में उनकी मेहनत का कितना असर चुनावी नतीजे पर होगा अभी कहना मुश्किल है.

  • प्रियंका गांधी

    राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी अपने भाई के सपने को साकार करने के लिए चुनाव प्रचार में कूद पड़ी हैं लेकिन उनका जादू अमेठी और राय बरेली के बाहर चलेगा या नहीं सबकी निगाहें इसी पर टिकी हुईं हैं.

  • मायावती

    उत्तरप्रदेश की मौजूदा मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती फिर सत्ता में आने की हर मुमकिन कोशिश कर रहीं हैं. हालांकि उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के बहुत गंभीर आरोप लगे हैं लेकिन उनके समर्थकों में इसका कोई असर है या नहीं ये कहना मुश्किल है.

  • मुलायम सिंह यादव

    मायावती को सत्ता में आने से रोकने के लिए अगर कोई सबसे कोशिश कर रहा है तो वो हैं पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव. मुलायम बहुत अच्छे से जानते हैं कि अगर इस बार वो मायावती को नहीं रोक सके तो फिर पांच साल के बाद ही उन्हें मौक़ा मिलेगा और तब तक राज्य और देश के राजनीतिक हालात पूरी तरह बदल जाएंगे. वो काफ़ी मेहनत कर रहे हैं और कुछ हद तक आश्वस्त भी लग रहें हैं कि उनकी पार्टी इस बार बेहतर प्रदर्शन करेगी.

  • आज़म ख़ान

    समाजवादी पार्टी के मुस्लिम चेहरा आज़म ख़ान पार्टी में वापस आ गए हैं और कांग्रेस की तरफ़ आकर्षित हो रहे मुसलमानों को समाजवादी पार्टी की तरफ़ खींचने के लिए दिन रात एक कर रहे हैं. पार्टी में उनकी वापसी भले ही हो गई है लेकिन एक समय में यूपी के सबसे बड़े मुस्लिम नेता माने जाने वाले आज़म ख़ान के लिए मुसलमानों का वोट पार्टी की झोली में डालना इस बार बहुत मुश्किल लग रहा है.

  • अखिलेश यादव

    इस बार उत्तर प्रदेश के चुनाव में अगर किसी एक नेता पर सबकी निगाहें टिकीं हैं तो वे हैं मुलायम सिंह के पुत्र और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव. जानकार बताते हैं कि युवा अखिलेश ने पूरी तरह से पार्टी का कमान संभाल लिया है और उम्मीदवारों के चयन में भी उनकी राय ही अंतिम मानी गई. वो काफ़ी मेहनत कर रहें हैं और समीक्षकों के अनुसार उनकी सभाओं में काफ़ी भीड़ भी जुट रही है.

  • उमा भारती

    इस बार उत्तरप्रदेश में भाजपा की नैया को पार लगाने की ज़िम्मेदारी दी गई है मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को. रामजन्म आंदोलन से राष्ट्रीय राजनीति में अपने लिए जगह बनाने वाली उमा भारती एक समय में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिनी जाती थीं लेकिन उन्हें 2005 में पार्टी से निकाल दिया गया था. छह साल के बाद 2011 में पार्टी में उनकी वापसी हुई लेकिन उनकी मंज़िल बहुत कठिन है . 2009 लोकसभा चुनाव के बाद तो वो कांग्रेस से भी पिछड़ गई थी. उमा भारती पूरी कोशिश कर रहीं हैं लेकिन ख़ुद उनकी पार्टी के कई लोग उनके साथ पूरा सहयोग नहीं कर रहें हैं.

  • सोनिया गांधी

    कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए ये चुनाव इसलिए भी बहुत अहम हैं क्योंकि प्रमुख विपक्षी दल भाजपा इसे सेमी फ़ाइनल की तरह देख रही है. अगर कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा होता है तो इसका असर केंद्रीय स्तर पर भी दिखेगा.

  • मनमोहन सिंह

    प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए ये चुनाव सीधे तौर पर उनकी छवि से जुड़ा हुआ है. व्यक्तिगत तौर पर मनमोहन सिंह के ख़िलाफ़ कभी किसी ने शायद ना कहा हो लेकिन उनकी यूपीए सरकार में भ्रष्टाचार के इतने मामले सामने आए हैं कि ये चुनाव भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक जनमतसंग्रह की तरह देखा जा रहा है.

  • अमरिंदर सिंह

    पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह अकाली दल को हराने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं. अकाली सरकार के ख़िलाफ़ भष्टाचार के आरोप तो बहुत लगे हैं लेकिन गुटों में बटी पंजाब कांग्रेस इसका कितना फ़ायदा उठा पाएगी कहना मुश्किल है.

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