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बाहुबली के गढ़ में

  • 22 फरवरी 2012

भारत सरकार पर करोड़ों के घोटालों के आरोपों और जनता के समर्थन से तेज हुए भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन के बाद देश में इस वर्ष पहले चुनाव हो रहे हैं.

पांच राज्यों में होने वाले इन चुनावों में भ्रष्टाचार का मुद्दा कितनी चोट करेगा? और जब ऐसे प्रत्याशी मैदान में हों जिनपर खुद आपराधिक मुकदमे हैं तो परिवर्तन की उम्मीद कितनी यथार्थपूर्ण है? आखिर इन दागी प्रत्याशियों को जनता चुनती ही क्यों है?

यही समझने की कोशिश की मऊ और बनारस में बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य ने.