रेल बजट पर लोगों की राय

 बुधवार, 14 मार्च, 2012 को 19:45 IST तक के समाचार

क्या है रेल बजट पर आम लोगों की राय?

  • रेल बजट

    अब किराया नौ साल के बाद बढ़ा है. रेल को चलाने के लिए पैसे भी चाहिए. इसमें कुछ ग़लत नहीं है. अगर किराया नहीं बढेगा तो फिर हम रेलवे से सुविधाओं की उम्मीद कैसे करेंगे. नई ट्रेनें चाहियें या फिर रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं, यह तब तक संभव नहीं होगा जब तक किराया नहीं बढ़ाया जाए. मगर अब जब किराया बढ़ाया जा रहा है तो उसके एवाज़ में सुविधाएं भी बढ़ाई जानी चाहिए. अभी जो सुविधाएं हैं वह काफी नहीं हैं. आज भी ट्रेनों का परिचालन सुचारू ढंग से नहीं हो पा रहा है. ट्रेनों के लेट चलने की बात तो आम है.

    सुमंगल उपाध्याय

    (सरकारी कर्मचारी )

  • रेल बजट

    बढ़ोत्तरी यात्री भाड़े की हो या माल धुलाई की. इसका दंश तो आम आदमी को ही झेलना पढता है. आज भी निम्न मध्य वर्ग और निम्न वर्ग के लोगों के लिए रेल ही एकमात्र सहारा है सफ़र का. अब इसके किराए में बढ़ोतरी की जा रही है जो ग़लत है. रेलवे को चाहिए की वह अपनी आमदनी बढ़ाने के दूसरे स्रोतों के बारे में विचार करे. लोग कह रहे हैं मामूली सी वृद्धि हुई है मगर वृद्धि तो हुई है ना. हमें एक रूपए की वृद्धि भी नहीं चाहिए. रेल प्रशासन बहुत चालकी से काम करता है. पिछले सालों में किराया तो नहीं बढ़ाया गया मगर टिकट कैंसल करने की रकम को बीस रूपए से बढाकर चालीस रूपए कर दिया गया और भी ट्रेनों के सिर्फ नाम बदल कर उन पर सुपर फास्ट का किराया लागू कर दिया गया.

    राजेश तिवारी

    (कोलकाता के एक नीजी कंपनी में सुपरवाइजर )

  • रेल बजट

    मैं महीने में दस-पंद्रह दिन रेल से ही यात्रा करता हूँ. मुंबई से दूसरे शहरों में मेरा आना जाना नियमित है. छोटा व्यवसायी हूँ. यह बिलकुल गलत है. किराये में बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए थी. माल ढ़ुलाई का किराया बढ़ाया जा सकता था, रेल मंत्री कम से कम यात्रियों को छोड़ देते. अब आने जाने में मुझे ज्यादा पैसे खर्च करने पढेंगे. किराए में बढ़ोतरी तब नहीं अखरती है जब सुविधाएं बढ़ा दी गयीं हों. अब आप देखिये स्टेशनों पर गन्दगी का अम्बार है. चूहों और कॉकरोच से यात्री परेशान हैं. स्टेशनों पर शौचालय कितने गंदे रहते हैं. पहले इन सारी सुविधाओं को बढ़ा कर बाद में किराया बढाया जाता तो ठीक था.

    पी के पुरोहित

    (मुंबई के कपड़ा व्यवसायी)

  • रेल बजट

    मैं एक शासकीय कर्मचारी हूँ. मुझे जो वेतन मिलता है उसके हिसाब से अब ट्रेन का सफ़र मेरे लिए महंगा हो जायेगा. बढ़ोतरी थोड़ी ही सही मगर मेरे घरेलु बजट पर इसका असर पढ़ेगा. किराए में बढ़ोतरी का असर हर चीज़ पर पड़ेगा. हमें जो महंगाई भत्ता मिलता है वह ऊँट के मूंह में जीरा जैसा ही है. बस और टेम्पो का सफ़र तो महंगा हो ही गया था. रेल एक सहारा था. अब इसका किराया भी बढ़ाया जा रहा है.

    एन बी उपाध्याय

    (सरकारी कर्मचारी)

  • रेल बजट

    यह रेल बजट तो बिहार के साथ सरासर बेइंसाफी है. वैसे भी कांग्रेस की जो सरकार है केंद्र में, उसका रवैया बिहार के प्रति कितना भेदभाव वाला है, उसका सबूत आज के रेल बजट से भी मिल जाता है. दीघा, मुंगेर और निर्मली की मेगा रेल पुल परियोजनाओं को ठण्डे बस्ते से निकालकर जल्दी पूरा करने जैसी घोषणा की उम्मीद पर पानी फिर गया. पिछले रेल बजट के समय बिहार के लिए नई रेलगाड़ी और नई रेल लाइन संबंधी किये गये वायदे को भी त्रिवेदी जी ने दरकिनार ही रखा. पता नहीं केंद्र सरकार इस राज्य के साथ कैसी दुश्मनी निकाल रही है!

    उत्तम कुमार, भागलपुर (बिहार)

  • रेल बजट

    अभी जो रेल बजट आया है, उसे सुनकर अचरज हो रहा है. अचरज इसलिए क्योंकि लगता है रेलमंत्री ने बिहार को देश के नक्शे से बाहर समझ लिया है. इस राज्य की छोटी-बड़ी रेल परियोजनाएं, जिन्हें लटका कर रखा गया है, उनके पूरा होने या नहीं होने जैसी कोई चर्चा रेलमंत्री के बजट-भाषण में थी ही नहीं. उधर रेल किराया इतना बढ़ा दिया है कि महंगाई की मार झेल रहा हमारे जैसा आम आदमी इसका बोझ उठा ही नहीं पायेगा. बिहार से अब रेलमंत्री नहीं रहने का ये मतलब नहीं कि इस पिछड़े राज्य के साथ सौतेला व्यवहार किया जाए.

    अभय कुमार, बिहटा (बिहार)

  • रेल बजट

    मुझे ख़ुशी है कि अमृतसर से पटना होते हुए नांदेड के लिए रेल की सेवा शुरू की जा रही है. गुरु परिक्रमा ट्रेन चलाने की घोषणा से सिख समुदाय में ख़ुशी अवश्य है मगर हमें अफ़सोस है की छत्तीसगढ़ की दूसरी मांगों को अनदेखा किया गया है. पिछले महीने रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी छत्तीसगढ़ आये हुए थे. उनसे यहाँ के लोगों नें मिलकर अपनी परेशानी बतायी. मगर रेल बजट में ऐसा कुछ नहीं दिखा जिससे लगे कि भारत के इस उपेक्षित इलाके के लिए कुछ भी किया जा रहा हो. जहाँ तक किराए में वृद्धि का सवाल है तो मैं इसे जायज़ ठहराता हूँ. वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में रेल को चलाना एक बड़ी चुनौती है. कई साल से किराए में वृद्धि नहीं की गयी थी. इसमें लोगों को भी सोचना चाहिए क्योंकि यह बढ़ोत्तरी बहुत ज्यादा नहीं है.

    हरजीत सिंह हंसपाल

    (व्यापारी)

Videos and Photos

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.