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रहने को घर नहीं...

सरकारी अनुमान के मुताबिक भारत में कम से कम दो करोड़ 70 लाख घरों की कमी है. काम की तलाश में छोटे शहरों से बड़े शहरों में आने वाले कामगारों की ऐसी बड़ी तादाद है.

सस्ते घर उपलब्ध करवाने के लिए सरकार ने प्रापर्टी डेवेलपरों को कई रियायतें देने की घोषणा की है. लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि टैक्स में कटौती भर करने से घरों की कमी की समस्या का समाधान नहीं होगा.

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है न सिर्फ सस्ते मकान मुहैया करवाने की बल्कि मकान उन क्षेत्रों में उपलब्ध करवाने की जो कामगारों के व्यवसाय से जुड़े हों.

बीबीसी संवाददाता रजनी वैद्यनाथन की रिपोर्ट.