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मैंने जिम कॉर्बेट को देखा है

  • 5 मई 2012

जिम कॉर्बेट को दुनिया भर में एक शिकारी के तौर पर ही नहीं बल्कि एक नायाब लेखक और वन्यजीवन के संरक्षक के तौर पर भी जाना जाता है.

'मैनईटर्स ऑफ़ कुमाऊँ' जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक जिम कॉर्बेट के साथ ख़तरनाक शिकार अभियानों पर जा चुके तमाम लोग अब नहीं रहे. लेकिन छोटी हल्द्वानी में एक ऐसे बुज़ुर्ग अब भी अपनी यादों को समेटे मौजूद हैं जिन्होंने 'कारपिट साहब' को अपने बचपन में देखा था और उनके साथ शिकार पर भी गए थे.

अस्सी बरस के दिवेन गोस्वामी से पिछले दिनों बीबीसी हिंदी के राजेश जोशी ने मुलाक़ात की और उनकी यादों को कुरेदा.