'उम्मीद है दिल्ली में लोग अनाप-शनाप बोलना बंद करेंगे'

 बुधवार, 8 अगस्त, 2012 को 07:43 IST तक के समाचार

मैरी कॉम में है दम

  • शर्ली

    शर्ली दिल्ली में पीएचडी की पढ़ाई कर रही हैं. उनका कहना है कि पूर्वोत्तर के लोगों को शायद मैरी कॉम की जीत की अधिक खुशी होगी.

    शर्ली कहती हैं, '' देखिए उन्होंने पांच बार विश्व कप जीता है लेकिन उन्हें भारत में इतना सम्मान नहीं मिला है जिसकी वो हक़दार हैं. यहां तो बस क्रिकेट और बॉलीवुड का ही बोलबाला है.''

    शर्ली को उम्मीद है कि मैरी कॉम की जीत से पूर्वोत्तर भारत के बारे में देश की राय में सुधार होगा.

    वे कहती हैं कि भारत ने अब तक ओलंपिक में गोल्ड मैडल नहीं जीता है और अगर मैरी कॉम ये कर पाती हैं तो सारे देश में उनका गुणगान होगा.

    ( सभी तस्वीरें और आलेख - पवन सिंह अतुल )

  • रोज़ी

    रोजी ने उम्मीद जताई कि मैरी कॉम की कामयाबी के बाद लोग महिलाओं का अधिक सम्मान करेंगे.

    लेकिन वे ये बिल्कुल नहीं मानती कि इससे कोई स्थाई परिवर्तन आएगा.

    रोज़ी का कहना है, " ये साधारण-सी ही तो है. कोई खेलने गया, जीता और वापस आया. फिलहाल हम सब ख़ुशियां मनाएंगे लेकिन उसके बाद एक बार फिर रोज़मर्रा की ज़िंदगी शुरू हो जाएगी. और लोग फिर वही करने लगेंगे जो हमेशा से करते रहे हैं. "

    रोजी कहती हैं कि मैरी कॉम नारी सशक्तिकरण का प्रतीक और एक महिला क्या-कुछ हासिल कर सकती है, इस बात का सबूत हैं.

  • अंबिका

    अंबिका का कहना है कि शायद मैरी कॉम की उपलब्धि से दिल्ली और भारत के अन्य हिस्सों में रहने वाली मणिपुरी और पूर्वोत्तर की लड़कियों के प्रति लोगों की राय बदलेगी.

    अंबिका कहती हैं कि उन्हें बॉक्सिंग बहुत पसंद है और मैरी कॉम कई वर्षों से उनके लिए प्रेरणा का स्रोत रही हैं.

  • खलिंग गमफुंड

    खलिंग गमफुंड भी छात्र हैं और मैरी कॉम की दिवानी भी.

    वे कहती हैं कि एक लड़की का और वो भी मणिपुर की लड़की का ओलंपिक में मैडल जीतना एक बहुत बड़ी बात है.

    खलिंग गमफुंड कहती हैं कि इस उपलब्धि के बाद भारत में महिला बॉक्सिंग को काफ़ी बढ़ावा मिलेगा.

    वे कहती हैं, "ये जानते हुए कि मैरी निकोला एडम्स से पहले हार चुकी हैं , मैं डर जाती हूं. लेकिन मुझे पूरा यक़ीन है कि वो इस बार ज़रुर जीतेंगीं. मैं अख़बारों में मैरी कॉम के बारे में पढ़ते हुए काफ़ी गौरवान्वित महसूस करती हूं. "

  • गंगमेई एजेंली कहती हैं कि मैरी कॉम की जीत पूरे देश की जीत होगी नाकि सिर्फ़ पूर्वोत्तर या मणिपुर की.

    एजेंला को लगता है कि मैरी कॉम की जीत के बाद पूर्वोत्तर से दिल्ली समेत अन्य बड़े शहरों में पढ़ने आए छात्रों को लोग बेहतर ढंग से समझेगे.

    वे कहती हैं मैरी कॉम ने सिर्फ़ मर्दों का खेल समझे जाने वाले बॉक्सिंग में अपना नाम कमाया है और ये महिलाओं के लिए बड़े गर्व की बात है, विशेषकर किसी मणिपुरी महिला के लिए.

  • असिन ज़ेलियांगरोंग

    असिन ज़ेलियांगरोंग कहती हैं कि इम्फाल से उनके दोस्त बार-बार फोन करके मैरी कॉम के बारे में बताते रहते हैं.

    असिन भी मैरी कॉम की उपलब्धियों के बारे में पूरी जानकारी रखती हैं.

    असिन ने बीबीसी को बताया, " मुझे उम्मीद है कि इस कामयाबी के बाद लोग हमारे बारे में यहां दिल्ली में अनाप-शनाप बोलना बंद कर देंगे. आपको मालूम है लोग हमसे पूछते हैं - क्या आप चीन से हैं, नेपाल से हैं. "

    उन्हें उम्मीद है कि अब ये बेवकूफाना सवाल बंद हो जाऐंगे और लोग उन्हें भी अपनी तरह भारतीय ही मानेंगे.

  • शेरन

    शेरन लुंगलेंग कहती हैं कि मणिपुरी महिलाओं के लिए ये एक बड़ी उपलब्धि होगी क्योंकि मैरी कॉम एक कामयाब खिलाड़ी के अलावा एक मां भी हैं.

    वे इसे एक ख़ूबसूरत उपहार की तरह मानती हैं.

    शेरन लुंगलेंग, " मैरी कॉम बहुत ही ताक़तवर और दक्ष हैं. वो मेरी ज़िंदगी की प्रेरणा बन चुकी हैं. "

    शेरन कहती हैं कि उन्हें बॉक्सिंग तो पसंद है लेकिन सिर्फ़ देखना. हाथ में दस्ताने पहनकर मुक्के बरसाना उन्हें कतई पसंद नहीं हैं.

    शेरन ने मैरी कॉम के दो बच्चों की तस्वीर अख़बारों में देखी है और वो कहती हैं कि लड़के बहुत ही 'क्यूट' हैं.

  • चोनरिवॉन सोलो

    चोनरिवॉन एम सोलो कहती हैं कि मैरी कॉम का पदक मणिपुर जैसे छोटे राज्य के लिए बड़ी बात है.

    चोनरिवॉन कहती हैं, " तमाम मुश्किलों के बावजूद मैरी कॉम ने ये सब हासिल किया है. मुझे उनसे बहुत प्रेरणा मिलती है. वे दिमागी और शरीरिक तौर पर बहुत ही मज़बूत हैं. "

    उन्हें भी उम्मीद है कि दिल्ली में पूर्वोत्तर से आए लोगों के प्रति मैरी कॉम की जीत के बाद लोगों का नज़रिया बदल सकता है.

    वे कहती हैं, " हम बाकी भारतियों से अलग दिखते हैं इसलिए हमें लोग हीन दृष्टि से देखते हैं. हमारे खान-पान और रहन-सहन को शक की नज़र देखा जाता है. "

Videos and Photos

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.